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अनदेखी पर दिव्‍यांगों का भड़का गुस्सा, 21 अप्रैल को शिमला में रोष रैली

  • दिव्यांगों ने सरकार के तीसरे बजट में पेंशन बढ़ोतरी न होने पर जताया आक्रोश

  • मांग: सभी दिव्यांगों को ₹5000 मासिक पेंशन मिले ताकि जीवनयापन संभव हो

  • शिमला में 21 अप्रैल को होगा धरना प्रदर्शन और रोष रैली


रविवार को हिमालयन दिव्यांग कल्याण संस्था की एक अहम बैठक आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता संस्था की जिला प्रधान हेमलता पठानिया ने की। इस बैठक में जिले भर से आए दिव्यांगों ने भाग लिया और सरकार की नीतियों पर कड़ा विरोध जताया।

संस्था ने सरकार द्वारा पेश किए गए तीसरे बजट में दिव्यांगों की पेंशन में बढ़ोतरी न होने पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। दिव्यांगों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में इतनी कम पेंशन में जीवनयापन करना बेहद कठिन हो गया है। इसलिए, उनकी मांग है कि सभी दिव्यांगों को कम से कम ₹5000 मासिक पेंशन दी जाए ताकि वे सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

संस्था का कहना है कि बार-बार सरकार से अपील करने के बावजूद उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, जिससे दिव्यांगों में भारी रोष है। इसी कारण दिव्यांग संगठनों ने मिलकर 21 अप्रैल को शिमला में धरना प्रदर्शन और रोष रैली करने का निर्णय लिया है

संस्था ने यह भी मांग रखी कि दिव्यांगों से जुड़े मामलों को प्रशासन और सरकारी कार्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएदिव्यांग एक्ट 2016 के तहत यदि समय पर मामले नहीं सुलझाए जाते, तो इसका कोई औचित्य नहीं बचता। दिव्यांगों को न्याय दिलाने के लिए सरकारी प्रक्रियाओं को तेज और प्रभावी बनाने की जरूरत है।

इसके अलावा, संस्था ने सभी दिव्यांगों को सस्ते दरों पर राशन उपलब्ध कराने की भी मांग की। दिव्यांगों का कहना है कि जो लोग बीपीएल सूची में नहीं आते, उन्हें भी रियायती दरों पर खाद्य सामग्री मिलनी चाहिए ताकि उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो सकें।

संस्था ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इन मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा