Devshri Pashakot Pilgrimage: हिमाचल प्रदेश की चौहारघाटी के आराध्य देव पहाड़ी वजीर देवश्री पशाकोट जी अपने तीन महीने के हारीफेरे (क्षेत्र भ्रमण) के बाद 19 मार्च 2025 को अपने मूल मंदिर मंठीबजगाण (देवगढ़) वापस लौट आए। देवता हर तीसरे वर्ष इस विशेष हारीफेरे के लिए निकलते हैं, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर भक्तों को दर्शन देते हैं।
इस वर्ष 14 दिसंबर 2024 को देवता ने अपने यात्रा क्रम की शुरुआत की थी। वे पहले बरोट क्षेत्र (देवगढ़, कुटगढ़), जोगिंद्रनगर-चौंतड़ा क्षेत्र (कर्णपुर गढ़) और फिर गुम्मा-घटासनी-उरला क्षेत्रों (गुम्मा ठाना) पहुंचे। महाशिवरात्रि इस वर्ष 26 फरवरी को होने के कारण देवता ने उरला स्थित मंदिर से सीधे पधर व द्रंग क्षेत्रों के विभिन्न गांवों से होते हुए मंडी महाशिवरात्रि मेले में भाग लिया।
महाशिवरात्रि मेले की समाप्ति के बाद, 5 मार्च को देवता ने अपनी वापसी यात्रा शुरू की और 19 मार्च को अपने मूल स्थान मंठीबजगाण पहुंचे। यहां देव हारका का आयोजन किया गया, हालांकि भंडारा अभी नहीं हुआ है। इसका कारण यह है कि 23 मार्च 2025 को देवता लघुशिवरात्रि के अवसर पर जोगिंद्रनगर मेले के लिए पुनः रवाना होंगे।



