➤ प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के नाम पर ‘एक्सीलेंस अवार्ड’ की शुरुआत
➤ उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मेधावी छात्रों को किया सम्मानित
➤ प्रो. सिम्मी का जीवन शिक्षाशास्त्र, शोध और समाज सेवा की मिसाल
शिमला/ऊना (पराक्रम चंद, ज्योति स्याल)
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में प्रेरणादायी योगदान देने वाली स्वर्गीय प्रोफेसर डॉ. सिम्मी अग्निहोत्री की स्मृति में अब एक नए पुरस्कार की शुरुआत की गई है। यह सम्मान ‘प्रोफेसर सिम्मी अग्निहोत्री एक्सीलेंस अवार्ड’ के नाम से प्रतिवर्ष मेधावी छात्रों और उत्कृष्ट शिक्षाविदों को दिया जाएगा।
रविवार को हरोली में आयोजित पहले संस्करण में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस पुरस्कार का औपचारिक शुभारंभ किया और विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। यह पहल प्रोफेसर सिम्मी अग्निहोत्री फाउंडेशन की ओर से की गई है।
प्रो. डॉ. सिम्मी अग्निहोत्री का जीवन हिमाचल और भारत के शैक्षणिक, सामाजिक और बौद्धिक परिदृश्य पर एक प्रेरक अध्याय रहा। 1968 में मंडी में जन्मी सिम्मी बचपन से ही बौद्धिक और रचनात्मक प्रतिभा की धनी थीं। उन्होंने बेहद कम आयु में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और वर्ष 1998 में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हुईं।
उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था—वह शोधकर्ता, साहित्यप्रेमी, समाजसेविका, प्रेरक शिक्षक, और कलाप्रेमी के रूप में जानी जाती थीं। लोक प्रशासन विभाग में उन्होंने न केवल उत्कृष्ट शिक्षण किया, बल्कि 25 से अधिक शोधार्थियों को पीएचडी और एमफिल की डिग्रियां दिलाने में मार्गदर्शन किया।
जनजातीय सशक्तिकरण, लैंगिक समानता, मानव संसाधन विकास, और स्थानीय शासन जैसे विषयों पर उन्होंने शोध किया, जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। उनके नाम 14 अंतरराष्ट्रीय शोधपत्र, 13 अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ, 7 संगोष्ठियों में भागीदारी, 2 पुस्तकें, और 2 शैक्षणिक ग्रंथ दर्ज हैं।
उनके शोध कार्य जापान, टर्की, पेरिस, स्पेन और पुर्तगाल जैसे देशों में प्रस्तुत किए गए, और खासतौर पर पांगी और पंगवाला जनजातियों पर किया गया उनका अध्ययन नीति निर्माण के स्तर पर प्रशंसित हुआ।
वर्ष 2023 में, उन्हें इंडोनेशिया की ट्रांसफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी फाउंडेशन से इंटरनेशनल बेस्ट टीचर अवार्ड और वियतनाम की संस्था से मोस्ट रिमार्केबल एजुकेटर एंड इंस्पायरिंग ग्लोबल रिसर्चर अवार्ड से नवाज़ा गया। उनकी मृत्यु के बाद भी उन्हें इंडोनेशिया द्वारा सर्टिफिकेट ऑफ रिकग्निशन से सम्मानित किया गया।
9 फरवरी 2024 को उनका देहांत हो गया, लेकिन उनकी 56 वर्षों की जीवन यात्रा में जो सृजन, सेवा और संस्कारों की परंपरा उन्होंने छोड़ी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरक प्रकाशस्तंभ बन चुकी है।



