➤ गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण की राह में मांझी खड्ड सबसे बड़ी बाधा
➤ 3,110 मीटर लंबे रनवे के लिए पुल निर्माण की रिपोर्ट अंतिम चरण में
➤ सीडब्ल्यूपीसी–वाप्कोस की 135 पेज रिपोर्ट सरकार के पास, अगस्त में हो सकता है फ़ैसला
हिमाचल प्रदेश के सबसे महत्वाकांक्षी अधोसंरचना प्रोजेक्ट्स में से एक गगल एयरपोर्ट विस्तारीकरण अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है, लेकिन इस पूरी परियोजना की राह में सबसे बड़ी तकनीकी और भूगोलिक चुनौती बनी है मांझी खड्ड, जिस पर रनवे का विस्तार तभी संभव हो पाएगा जब पुल निर्माण की बाधा पार होगी।
गगल एयरपोर्ट की मौजूदा हवाई पट्टी महज 1,370 मीटर लंबी है, जबकि सरकार ने अब इसे बढ़ाकर 3,110 मीटर करने का प्रस्ताव रखा है। इस दिशा में भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना पहले ही जारी हो चुकी है और करीब 450 करोड़ रुपये की राशि भी वितरित की जा चुकी है। लेकिन असली पेच मांझी खड्ड के उस हिस्से में फंसा है, जहां रनवे के विस्तार के लिए एक टेक्निकल पुल बनाना जरूरी है।
इस तकनीकी चुनौती से निपटने के लिए सीडब्ल्यूपीसी (सेंट्रल वाटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन), पुणे और वाप्कोस लिमिटेड ने संयुक्त रूप से 135 पेज की विस्तृत ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार की है, जिसे राज्य सरकार को सौंप दिया गया है। रिपोर्ट में पुल का आकार, पिलरों की संख्या, जलप्रवाह का व्यवहार और संरचनात्मक स्थायित्व जैसे सारे पक्षों को शामिल किया गया है। अब इसकी स्क्रूटनी प्रक्रिया शुरू हो गई है, और उम्मीद है कि अगस्त माह में पुल की फाइनल डिज़ाइन पर मुहर लग सकती है।
गगल एयरपोर्ट का विस्तारीकरण केवल हवाई यातायात नहीं, बल्कि कांगड़ा–धौलाधार क्षेत्र के पर्यटन और निवेश के भविष्य को नई उड़ान देगा। यह प्रोजेक्ट क्षेत्र के कई गांवों को प्रभावित करेगा, जिनमें कांगड़ा विधानसभा के तहत बाग, बल्ला, बरस्वालकड़, गगल खास, भेड़ी, दुगियारी खास, झिकली इच्छी, मुगरेहड़, सहौड़ा और सनौरा शामिल हैं, जबकि शाहपुर क्षेत्र के रछियालू, जुगेहड़, भड़ोत और क्योड़ी गांव भी इस योजना की जद में आ चुके हैं।
अगर मांझी खड्ड पर पुल निर्माण की स्वीकृति और कार्य शीघ्र शुरू होता है, तो हिमाचल के इस छोटे हवाई अड्डे को इंटरनेशनल एविएशन नेटवर्क से जोड़ना अब सपना नहीं, हकीकत बन सकता है।



