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सनोट गांव में श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर गिरिराज लीला का भावमय वर्णन

➤ सनोट गांव में भागवत कथा में गूंजी गिरिराज धारण लीला
➤ कृष्ण के गिरिधारी स्वरूप का भक्तिपूर्ण वर्णन
➤ रूक्मणी-कृष्ण विवाहोत्सव कल होगा धूमधाम से

देहरा, Barjeshwar Saki



तहसील देहरा के सनोट गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और अध्यात्म का संगम देखने को मिला। प्रागपुर के प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित सुमित शास्त्री ने आज भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गिरिराज पर्वत धारण करने की लीला का ऐसा भावमय वर्णन किया कि पूरा पंडाल हरि नाम से गूंज उठा।

शास्त्री ने कथा का आरंभ माता यशोदा द्वारा गोपाष्टमी पर्व पर श्रीकृष्ण को गौचारण पर भेजने की कथा से किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने अपने बाल सखाओं श्रीदामा, तोक, बिलवमंगल, धनसुखा और मनसुखा के साथ गौसेवा की और यमुना तट पर बांसुरी बजाई, जिससे समस्त ब्रजमंडल आनंदित हो गया। यह दृश्य भक्ति भाव से ओतप्रोत था।

इसके पश्चात कथा में धेनुकासुर वध और कालिया नाग के मर्दन की कथा को विस्तार से सुनाया गया। लेकिन सबसे अधिक श्रद्धा और समर्पण उस समय दिखा जब गिरिराज पर्वत उठाने की लीला सुनाई गई। इन्द्रदेव के कोप से जब ब्रजवासियों पर संकट आया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिनों तक वर्षा से रक्षा की। यही कारण है कि उन्हें ‘गिरिधारी’ कहा जाता है।

कथा के बीच जब “मन चल वृन्दावन चलिए” और “मैं तो गोवर्धन को जाऊं मेरे वीर” जैसे भक्तिपूर्ण भजन प्रस्तुत किए गए, तो श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूम उठे। संपूर्ण पंडाल हरिनाम और श्रीकृष्ण की जयकारों से गूंज उठा।

कथा में विश्ववदीप, साहिल ठाकुर, ऋषभ, रितिक, प्रेमलता, मंजु, निरीक्षा देवी, शिखा और सपना ने भावपूर्ण सहयोग और सहभागिता निभाई। आयोजक शुभकरण नरियाल ने बताया कि कल कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण और रूक्मणी जी का विवाहोत्सव मनाया जाएगा, जो धार्मिक उल्लास और भव्यता से भरपूर रहेगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के भाग लेने की संभावना है।