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हाटी समुदाय ST दर्जा: 40 हजार से अधिक छात्रों की करियर पर सियासत भारी

हाटी समुदाय को ST दर्जा मिलने के बावजूद हिमाचल में कानून लागू नहीं
40 हजार से अधिक छात्र स्कॉलरशिप और नौकरियों से वंचित
हाटी समिति ने सरकार, राज्यपाल और केंद्र से हस्तक्षेप की गुहार लगाई



हाटी समुदाय को भले ही केंद्र सरकार द्वारा संवैधानिक संशोधन के ज़रिए अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा मिल चुका हो, लेकिन यह दर्जा हिमाचल प्रदेश में अब तक लागू नहीं हो पाया है। इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं 40 हजार से अधिक छात्र, जिन्हें एसटी सर्टिफिकेट के अभाव में न तो छात्रवृत्ति मिल रही है, न ही प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन के बाद लाभ

इस मुद्दे को लेकर केंद्रीय हाटी समिति की शिमला इकाई ने शिमला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में सरकार के खिलाफ गंभीर चिंता जताई। समिति के अध्यक्ष डॉ. रमेश सिंगटा ने कहा कि यह स्थिति न केवल छात्रों के करियर को बर्बाद कर रही है, बल्कि केंद्रीय कानून और संसद का भी अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की उदासीनता और लटकाऊ नीति की वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है।

डॉ. सिंगटा ने कहा कि कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाएं उत्तीर्ण करने के बाद भी एसटी सर्टिफिकेट के अभाव में नियुक्ति से वंचित रह गए हैं। उन्होंने मांग की कि हिमाचल सरकार इस मामले में हाई कोर्ट में तत्परता से और प्राथमिकता से पैरवी करे, ताकि न्याय मिल सके।

समिति ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने जो कानून पारित किया है उसकी गलत व्याख्या करके हिमाचल में इसके लागू होने में देरी की जा रही है। अब राज्यपाल और केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है ताकि हाटी समुदाय को उनका संवैधानिक हक मिल सके।

डॉ. सिंगटा ने यह भी दोहराया कि यह मामला अब छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, और किसी भी प्रकार की राजनीतिक खींचतान 40 हजार परिवारों के सपनों पर पानी फेर सकती है। समिति ने चेताया कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया जा सकता है।