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तीन मंजिला से अधिक भवन के लिए स्ट्रक्चर इंजीनियर रिपोर्ट जरूरी


➤ ढाई मंजिला भवन निर्माण पर स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट अनिवार्य
➤ भूस्खलन और आपदाओं से नुकसान रोकने के लिए सरकार का फैसला


हिमाचल प्रदेश में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण को लेकर नियम और सख्त कर दिए गए हैं। अब तीन मंजिला से अधिक भवन निर्माण के लिए स्ट्रक्चर इंजीनियर की रिपोर्ट अनिवार्य होगी, जबकि ढाई मंजिला भवन के लिए स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी प्रमाण पत्र जरूरी होगा। इन दस्तावेजों के बिना भवन को वैध नहीं माना जाएगा

प्रदेश सरकार ने यह प्रावधान एचपीटीसीपी रूल्स-21 में शामिल किया है। पहले यह शर्त केवल सरकारी भवनों पर लागू थी, लेकिन अब इसे आम नागरिकों के लिए भी अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे भवनों की मजबूती सुनिश्चित होगी और भूस्खलन व प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने शिमला, कुल्लू, धर्मशाला, ऊना, मंडी, सोलन, नाहन और चंबा सहित कई शहरों के लिए डेवलपमेंट प्लान तैयार किया है। प्राकृतिक आपदाओं से प्रदेश में सरकारी और निजी भवनों को हो रहे नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार की टीमों ने भी हिमाचल का दौरा किया था और स्ट्रक्चर इंजीनियर रिपोर्ट को अनिवार्य करने की सिफारिश की थी।

शिमला प्लानिंग एरिया में तीन से पांच मंजिला तक भवन निर्माण की अनुमति दी गई है। जहां पांच मीटर चौड़ी सड़क उपलब्ध है, वहां पांच मंजिला भवन बनाए जा सकते हैं। जिन क्षेत्रों में सड़क सुविधा नहीं है, वहां दो मंजिला भवन और एटिक निर्माण की अनुमति होगी।

टीसीपी मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि डेवलपमेंट प्लान में इस नियम को पूरी तरह लागू किया गया है। साथ ही प्रदेश में अब नालों और खड्डों के किनारे तय दूरी पर ही भवन निर्माण की अनुमति दी जाएगी। नालों से 5 मीटर और खड्डों व नदियों से 7 मीटर दूरी अनिवार्य होगी।