➤ सुक्खू सरकार की कैबिनेट में वन भूमि अतिक्रमण नीति पर लग सकती है मुहर
➤ 300 डॉक्टरों के लीव रिजर्व कैडर समेत सैकड़ों पद भरने पर फैसला संभव
➤ कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के मर्जर और मल्टी टास्क वर्कर कॉमन कैडर पर चर्चा संभावित
हिमाचल प्रदेश सरकार की शनिवार को होने वाली महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में कई बड़े और जनहित से जुड़े फैसले लिए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा होगी।
कैबिनेट की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में वन भूमि पर अतिक्रमण को नियमित करने के लिए तैयार की जा रही नई नीति शामिल है। सरकार लघु और सीमांत किसानों को राहत देने के उद्देश्य से इस नीति को मंजूरी दे सकती है। यदि कैबिनेट से इसे हरी झंडी मिलती है तो इसके बाद प्रस्ताव को केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भेजा जाएगा। माना जा रहा है कि इस फैसले से प्रदेश के हजारों किसानों को राहत मिल सकती है, जो वर्षों से वन भूमि से जुड़े मामलों का समाधान चाहते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए भी कैबिनेट में बड़े निर्णय लिए जाने की संभावना है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तावित 300 डॉक्टरों के लीव रिजर्व कैडर को मंजूरी मिल सकती है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद डॉक्टरों के अवकाश, प्रशिक्षण या पीजी कोर्स के दौरान अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी और जरूरत के अनुसार डॉक्टरों की तैनाती की जा सकेगी।
इसके अलावा 200 स्टाफ नर्सों, सीनियर रेजिडेंट्स, तथा करीब 180 ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट और रेडियोग्राफर के पद भरने को भी स्वीकृति मिलने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी को दूर कर मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
बैठक में मल्टी टास्क वर्करों के लिए कॉमन कैडर बनाने के प्रस्ताव पर भी विस्तार से चर्चा हो सकती है। वर्तमान में विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों मल्टी टास्क वर्कर अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत सेवाएं दे रहे हैं। कॉमन कैडर बनने से उनकी सेवा शर्तों और प्रशासनिक व्यवस्था में एकरूपता आने की उम्मीद है।
शिक्षा विभाग से जुड़े मुद्दे भी कैबिनेट एजेंडे में शामिल हैं। सरकार कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पास की पाठशालाओं में मर्ज करने के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला ले सकती है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विद्यार्थियों को अधिक सुविधाएं मिल सकेंगी। हालांकि इस मुद्दे पर प्रदेश के कई क्षेत्रों में पहले से चर्चा और बहस जारी है।
इसके अतिरिक्त विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरने और नई भर्तियों को मंजूरी देने पर भी कैबिनेट निर्णय ले सकती है। ऐसे में प्रदेश के युवाओं और कर्मचारियों की नजरें इस बैठक पर टिकी हुई हैं।



