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हिमाचल के पांच वीर सपूतों को मिला वीर चक्र और शौर्य चक्र

हिमाचल के पांच वीर सपूतों को वीर चक्र और शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में प्रदान किए सैन्य अलंकरण

आतंकियों और उग्रवादियों के खिलाफ अभियानों में दिखाई अदम्य बहादुरी का मिला सम्मान


हिमाचल प्रदेश के पांच जांबाज सैनिकों ने आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ अभियानों में अदम्य साहस का परिचय देकर न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। इन वीर सपूतों को उनकी असाधारण बहादुरी, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए देश के प्रतिष्ठित सैन्य अलंकरण वीर चक्र और शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। सोमवार को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन वीर जवानों और उनके परिजनों को सम्मान प्रदान किया।

इस सम्मान सूची में मंडी, बिलासपुर, शिमला और ऊना जिलों के पांच सैनिक शामिल हैं। इनमें बिलासपुर के वीर सपूत लांस दफादार बलदेव चंद को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। उनके परिवार ने राष्ट्रपति भवन में यह सम्मान ग्रहण किया। समारोह के दौरान पूरे प्रदेश को अपने इन वीर बेटों पर गर्व महसूस हुआ।

मंडी जिले के जोगिंद्रनगर उपमंडल की मकरीड़ी क्षेत्र के समोहली गांव निवासी नायब सूबेदार सतीश कुमार को वीर चक्र से सम्मानित किया गया। चौथी बटालियन डोगरा रेजिमेंट में सेवाएं दे रहे सतीश कुमार ने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के निकट दुश्मन की भारी गोलीबारी के बीच असाधारण साहस का परिचय दिया। उन्होंने दुश्मन के कई ठिकानों को तबाह कर अभियान को सफल बनाया। उनके इस पराक्रम से दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचा। वर्तमान में उनकी तैनाती पंजाब के अबोहर में है। उनके पिता नंद लाल पूर्व सैनिक हैं, जबकि माता कृष्णा देवी गृहिणी हैं।

शिमला जिले की जुब्बल तहसील के घुंसा गांव निवासी मेजर अंशुल बाल्टू को भी वीरता के लिए सम्मानित किया गया। अप्रैल 2025 में असम के दीमा हसाओ क्षेत्र में एक विशेष सैन्य अभियान के दौरान उन्होंने असाधारण नेतृत्व और साहस का परिचय दिया। खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए इस अभियान में उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें मेजर अंशुल ने बहादुरी दिखाते हुए एक उग्रवादी को मार गिराया और अभियान को सफल बनाया।

मंडी जिले के जोगिंद्रनगर क्षेत्र की दारट बगला पंचायत निवासी कैप्टन योगेंद्र ठाकुर को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपने दल का नेतृत्व किया। आतंकियों की मौजूदगी वाली जगह तक वह रेंगते हुए पहुंचे और बेहद नजदीकी मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया। उनकी सूझबूझ और साहस ने मिशन की सफलता में अहम भूमिका निभाई।

ऊना जिले के चढ़तगढ़ गांव के वीर सपूत लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। नवंबर 2024 में कश्मीर में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया। एक घर में छिपे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्होंने नेतृत्व संभाला और अभियान को सफल बनाया। उनकी बहादुरी के चलते सेना ने दो आतंकियों को मार गिराया।

वहीं बिलासपुर जिले की सनीहरा पंचायत के गांव थेह के रहने वाले लांस दफादार बलदेव चंद की वीरता की कहानी हर भारतीय को गर्व से भर देती है। सितंबर 2025 में उधमपुर क्षेत्र में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान आतंकियों ने घात लगाकर हमला कर दिया था। अपने साथियों को बचाने के लिए बलदेव चंद बिना जान की परवाह किए आतंकियों से भिड़ गए। भीषण संघर्ष के दौरान उन्होंने एक आतंकी से विदेशी पिस्तौल छीन ली और अपने साथियों की जान बचाई। इस दौरान उनके सीने में गोली लगी, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह अंतिम सांस तक आतंकियों से लड़ते रहे और वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी इस सर्वोच्च वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित अनेक नेताओं ने इन वीर सपूतों और उनके परिवारों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि हिमाचल की धरती हमेशा से वीरों की भूमि रही है और इन जवानों ने एक बार फिर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है।