➤ हिमाचल में बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ीं
➤ 15 अप्रैल से 28 मई तक 263 वन अग्निकांड, 3300 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित
➤ आग से अब तक करीब 82 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान
हिमाचल प्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में जंगल धू-धू कर जल रहे हैं और आग की लपटों से बहुमूल्य वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। 15 अप्रैल से 28 मई तक प्रदेश में जंगलों में आग लगने की कुल 263 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं में लगभग 3300 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हुई है, जबकि अब तक करीब 82 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
राजधानी शिमला से लेकर सोलन, जुन्गा और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों तक जंगलों में आग का कहर देखने को मिल रहा है। आग की वजह से न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि वन्य जीवों और प्राकृतिक संसाधनों पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में धुएं और आग की लपटों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
सोलन जिले में जंगलों में लगी आग का असर कालका-शिमला रेललाइन पर भी देखने को मिला। बुधवार को सनवारा के समीप रेलवे ट्रैक के आसपास आग फैलने के कारण दो रेलगाड़ियों को करीब ढाई घंटे तक एक ही स्थान पर रोकना पड़ा। रेलवे प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से ट्रेनों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी थी, जिससे यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
राजधानी शिमला के जंगलों में भी लगातार आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं। टुटीकंडी स्थित मानसिक रोगी अस्पताल के समीप जंगल में लगी आग ने स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की चिंता बढ़ा दी। एक बार आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन रात के समय तेज हवाओं के कारण आग फिर भड़क उठी।
इसके अलावा शिमला के बाग गांव के पास जंगलों में लगी आग से वन संपदा को भारी नुकसान पहुंचा। जुन्गा के जंगलों में भी गुरुवार सुबह अचानक आग भड़क गई, जिसने देखते ही देखते बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। वहीं रझाना के जंगलों में पिछले दो दिनों से लगी आग पर काफी मशक्कत के बाद काबू पाया जा सका।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मियों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन इस बार हालात ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से समय रहते ठोस कदम उठाने की मांग की है।
इस बीच हिमाचल प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत नेगी ने कहा कि प्रदेश में अधिकतर आग चीड़ के जंगलों में लगती है। उन्होंने बताया कि कई बार लोग थोड़ी घास पाने या अन्य कारणों से भी जंगलों में आग लगा देते हैं, जिससे स्थिति भयावह हो जाती है। उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में आग बुझाने में काफी दिक्कत आती है क्योंकि वहां तक वाहन नहीं पहुंच पाते।
राजस्व मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लंबे समय से जंगलों की आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में पानी की कमी नहीं है, लेकिन कई स्थान ऐसे हैं जहां सड़क संपर्क न होने के कारण दमकल वाहन नहीं पहुंच पाते। ऐसे में हवाई सहायता बेहद जरूरी हो जाती है। उन्होंने बताया कि कसौली में जब आग आर्मी एरिया तक पहुंच गई थी, तब एयर फोर्स की मदद से आग पर काबू पाया गया।
प्रदेश में बढ़ती आग की घटनाओं ने पर्यावरण संरक्षण और वन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार बढ़ती गर्मी और सूखे मौसम के बीच प्रशासन ने लोगों से जंगलों में सावधानी बरतने और आग लगने की स्थिति में तुरंत सूचना देने की अपील की है।



