➤ हिमाचल सरकार ने दो IAS अधिकारियों को दी अतिरिक्त जिम्मेदारी
➤ आशीष सिंघमार को मिला पशुपालन विभाग का चार्ज
➤ अमरजीत सिंह संभालेंगे गृह विभाग की अहम जिम्मेदारी
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फैसला लेते हुए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां सौंपी हैं। मुख्य सचिव केके पंत द्वारा जारी आदेशों के अनुसार 2008 बैच के आईएएस अधिकारी आशीष सिंघमार और 2010 बैच के आईएएस अधिकारी अमरजीत सिंह को अतिरिक्त विभागों का कार्यभार सौंपा गया है। इस फैसले को राज्य प्रशासन में बेहतर समन्वय और कार्य संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जारी आदेशों के मुताबिक आशीष सिंघमार, जो वर्तमान में सेक्रेटरी डिजिटल टेक्नोलॉजी एंड गवर्नेंस, सेक्रेटरी टू मुख्यमंत्री, जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (GAD) और स्पेशल एरिया डेवलपमेंट (SAD) जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उन्हें अब पशुपालन विभाग का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया है। प्रदेश में पशुपालन क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, ऐसे में यह विभाग भी अहम जिम्मेदारी वाला माना जाता है।
वहीं 2010 बैच के आईएएस अधिकारी अमरजीत सिंह को सुक्खू सरकार ने गृह विभाग (होम डिपार्टमेंट) की अतिरिक्त जिम्मेदारी देकर महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व सौंपा है। सरकार की ओर से जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि अमरजीत सिंह एडिश्नल चीफ सेक्रेटरी (ACS) होम के नियंत्रण में कार्य करेंगे और गृह विभाग से जुड़े प्रशासनिक मामलों की निगरानी करेंगे।
अमरजीत सिंह वर्तमान में सेक्रेटरी कॉरपोरेशन के पद पर कार्यरत हैं। गृह विभाग का अतिरिक्त कार्यभार मिलने के बाद उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। गृह विभाग राज्य की कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय से जुड़ा प्रमुख विभाग माना जाता है।
गौरतलब है कि इससे पहले गृह विभाग की जिम्मेदारी एसीएस केके पंत के पास थी। हाल ही में केके पंत को प्रदेश का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है, जिसके बाद गृह विभाग के अतिरिक्त प्रभार को लेकर नई व्यवस्था की गई है।
सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार जल्द ही प्रशासनिक ढांचे में कुछ और बदलाव कर सकती है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य आईएएस अधिकारियों के विभागों में भी फेरबदल देखने को मिल सकता है। ऐसे में नौकरशाही में और बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं।
सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक कार्यों में गति लाने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें संभावित अगले प्रशासनिक फेरबदल पर टिकी हुई हैं।



