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हिमाचल हाईकोर्ट की एनएचएआई को कड़ी फटकार, शिमला-सोलन हाईवे की हालत पर जताई नाराजगी, 2017 से अब तक वसूले गए टोल टैक्स का ब्योरा मांगा

➤ हाईकोर्ट ने शिमला-सोलन-परवाणू नेशनल हाईवे की बदहाल स्थिति पर एनएचएआई को लगाई फटकार
➤ अदालत ने कहा- अधिकारी रखरखाव में पूरी तरह नाकाम, टोल बंद करने तक की चेतावनी
➤ 18 सितंबर को पेश होगी कार्ययोजना, सेब सीजन में ट्रैफिक जाम से बागवानों को हो रहा भारी नुकसान



हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला-सोलन-परवाणू राष्ट्रीय राजमार्ग की खस्ताहाल स्थिति को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने साफ कहा कि प्राधिकरण के अधिकारी प्रीमियम हाईवे की अनदेखी कर रहे हैं, जिसका सीधा असर आम जनता और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में क्षेत्रीय अधिकारी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि एनएचएआई को अब एक व्यापक कार्य योजना पेश करनी होगी, जिससे यह स्पष्ट हो कि राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों का सही रखरखाव कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। अदालत ने एनएचएआई के परियोजना निदेशक आनंद कुमार की ओर से दाखिल हलफनामे को असंतोषजनक बताया और पाया कि इसमें गलत तथ्य दर्शाए गए हैं।

हलफनामे में कहा गया था कि स्टोन क्रशर हाईवे पर सिर्फ 20 मीटर क्षेत्र में है, लेकिन मौके पर निरीक्षण में पाया गया कि यह करीब 200 मीटर क्षेत्र में फैला है, जिससे सड़क की चौड़ाई कम हो रही है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि हालात सुधरे नहीं तो सनवारा में टोल बंद करने का आदेश दिया जा सकता है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी अन्य राज्यों में किया है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि सेब सीजन के दौरान रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। जुलाई-अगस्त में चक्की मोड़ पर सड़क तीन बार से ज्यादा बंद हुई, जिससे पांच किलोमीटर लंबा जाम लग गया। इससे न केवल लोगों को असुविधा हुई बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर पड़ा।


हाईकोर्ट ने एनएचएआई से 2017 से अब तक वसूले गए टोल टैक्स का ब्योरा मांगा है। इसके अलावा परवाणू से सोलन-कैथलीघाट तक काम करने वाले सभी ठेकेदारों का विवरण भी पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह जांचा जा सके कि कहीं ठेकेदारों को सांठगांठ करके तो काम नहीं दिया गया।

कोर्ट ने सलोगड़ा के पास बन रहे एक पुल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। पाया गया कि एक पिलर की ऊंचाई 77.280 मीटर है, जो स्थिरता और भार वहन क्षमता के मानकों पर खरा नहीं उतर रहा। अदालत ने इस पर अब तक हुए खर्च का विवरण भी मांगा और पूछा कि ठेकेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है।

अब 18 सितंबर को अगली सुनवाई होगी, जिसमें एनएचएआई को विस्तृत योजना और सभी मांगे गए ब्योरे पेश करने होंगे।