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दैनिक भोगी कर्मचारियों के पक्ष में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कर्मचारियों को मिलेगा पूरा वित्तीय लाभ, सरकार का तर्क खारिज

  • हिमाचल हाईकोर्ट ने दैनिक भोगी कर्मचारियों को वास्तविक वित्तीय लाभ देने का आदेश बरकरार रखा
  • सरकार का ‘काल्पनिक लाभ’ वाला तर्क अदालत ने किया खारिज
  • 2012 से 2015 तक के एरियर पर 9 फीसदी ब्याज देने के आदेश को भी सही ठहराया गया

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के हित में एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पूर्वव्यापी नियमितीकरण (Retrospective Regularization) मिलने पर कर्मचारियों को केवल कागजी या काल्पनिक लाभ नहीं, बल्कि वास्तविक वित्तीय लाभ भी दिए जाने चाहिए। अदालत ने राज्य सरकार के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कर्मचारियों को नियमितीकरण का लाभ तो मिलेगा, लेकिन पुराने वेतन और एरियर का भुगतान नहीं किया जाएगा।

न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की सेवा निरंतर मानी गई है और उसे पूर्व प्रभाव से नियमित किया गया है, तो उसे उससे जुड़े सभी परिणामी लाभ भी मिलेंगे। जब तक किसी न्यायिक आदेश में स्पष्ट रूप से वित्तीय लाभों पर रोक न लगाई जाए, तब तक “परिणामी लाभ” का अर्थ वास्तविक मौद्रिक लाभ ही माना जाएगा।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विभाग अपनी प्रशासनिक गलतियों और देरी का बोझ गरीब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर नहीं डाल सकता। कर्मचारियों को उनके वैध अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला लोक निर्माण विभाग (PWD) में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों से जुड़ा था। कर्मचारियों का आरोप था कि विभाग ने उन्हें काल्पनिक ब्रेक देकर सेवा से बाहर दिखाया, जिससे उनकी नियमितीकरण प्रक्रिया प्रभावित हुई।

मामला लेबर कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने माना कि विभाग की ओर से दिया गया ब्रेक अवैध था। लेबर कोर्ट ने आदेश दिया कि कर्मचारियों की वरिष्ठता उनकी प्रारंभिक नियुक्ति तिथि से मानी जाए और उन्हें उनके जूनियर कर्मचारियों के नियमित होने की तारीख से नियमितीकरण का लाभ दिया जाए।

इसके बाद सरकार ने कर्मचारियों को कागजों में वर्ष 2012 से नियमित तो कर दिया, लेकिन 2012 से 2015 के बीच का वेतन अंतर और एरियर देने से इनकार कर दिया। सरकार का तर्क था कि लेबर कोर्ट ने पुराने वेतन के भुगतान का अलग से निर्देश नहीं दिया था।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि यदि कर्मचारियों को पूर्व प्रभाव से नियमित माना गया है, तो उस अवधि के सभी वित्तीय लाभ भी उन्हें मिलेंगे। अदालत ने लेबर कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें कर्मचारियों को 2012 से 2015 तक के वेतन अंतर का पूरा एरियर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का निर्देश दिया गया था।

अदालत के इस फैसले को राज्य के हजारों दैनिक भोगी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भविष्य में ऐसे मामलों में कर्मचारियों के अधिकार और अधिक मजबूत हो सकते हैं।