➤ मणिमहेश यात्रा में फंसे 1166 श्रद्धालुओं का रेस्क्यू, चिनूक हेलीकॉप्टर से चला अभियान
➤ कोटखाई की गुम्मा–बाघी सड़क भारी भूस्खलन से बाधित, चेतन बरागटा ने किया निरीक्षण
➤ सेब कारोबार संकट में, हरीश चौहान बोले- सरकार बागवानों की मदद को लोन ले
हिमाचल प्रदेश लगातार प्राकृतिक आपदाओं और संकटों से जूझ रहा है। एक ओर जहां मणिमहेश यात्रा में फँसे श्रद्धालुओं का वायुसेना ने अब तक का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बचाव किया, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की सड़कें भूस्खलन से ठप पड़ी हैं। साथ ही, लगातार हुई भारी बारिश ने सेब कारोबार को भी गहरे संकट में डाल दिया है।
पिछले 24 घंटों में 1166 श्रद्धालुओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। आज सुबह 6:30 बजे वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू अभियान शुरू हुआ। 12 उड़ानों के ज़रिए 524 श्रद्धालुओं को भरमौर से चंबा पहुँचाया गया, जहाँ से एचआरटीसी बसों के माध्यम से उन्हें निःशुल्क नूरपुर और पठानकोट भेजा गया। इस दौरान तीन श्रद्धालुओं के शव भी चंबा लाए गए हैं। अधिकतर श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि बाकी का रेस्क्यू अभियान कल जारी रहेगा। प्रशासन ने इस बड़े ऑपरेशन में शामिल सभी संस्थानों और कर्मियों का आभार जताया है।
वहीं, कोटखाई की गुम्मा–बाघी सड़क पर कोठी स्थान में भारी भूस्खलन से यातायात पूरी तरह बाधित है। मौके पर पहुंचे भाजपा नेता चेतन बरागटा ने स्थिति का जायज़ा लिया और लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि मार्ग बहाली का काम सतर्कता और सुरक्षा के साथ होना चाहिए ताकि किसी भी कर्मचारी की जान जोखिम में न पड़े।
इधर, भारी बारिश का असर सेब कारोबार पर बुरी तरह पड़ा है। संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने बताया कि हिमाचल में 1948 के बाद इतनी भयंकर बारिश दर्ज की गई है। राज्य में अब तक 450 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो चुकी है, जिससे लगभग 4 से 5 लाख पेटी सेब जगह-जगह फँसे पड़े हैं। 1100 से अधिक सड़कें बंद हैं और कई नेशनल हाईवे भी ठप हैं।
हरीश चौहान ने कहा कि सरकार जैसे कर्मचारियों का वेतन देने के लिए लोन लेती है, वैसे ही इस बार 5000 करोड़ रुपए के सेब कारोबार को बचाने के लिए भी लोन लेकर बागवानों को सीधी आर्थिक मदद दी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार और विपक्ष दोनों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मानसून सत्र में किसी भी नेता ने बागवानों के मुद्दे को गंभीरता से नहीं उठाया।
प्रदेश के सामने आज स्थिति यह है कि एक तरफ श्रद्धालुओं की जान बचाने के लिए हेलीकॉप्टर ऑपरेशन चलाना पड़ रहा है, दूसरी तरफ किसान-बागवान अपनी जीविका बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
लगातार हो रही भारी बरसात ने हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में तबाही मचा दी है। जोगिंदरनगर उपमंडल भी इससे अछूता नहीं रहा। यहां व्यास नदी के कटाव ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया है। ग्राम पंचायत लांगना के कोटला और पट्टा गांव में दर्जनभर घरों और गोशालाओं पर संकट मंडरा रहा है। कई परिवार असुरक्षा और भय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, कई घरों की दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। जमीन भी धीरे-धीरे धंसने लगी है, जिससे लोग हर पल अपने आशियाने के ढह जाने के खतरे में जी रहे हैं। परिवार अपने बच्चों और पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए चिंतित हैं।
ऐसे हालात में जोगिंदरनगर के विधायक प्रकाश राणा प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और प्रशासन को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए। साथ ही उन्हें राहत सामग्री भी मुहैया करवाई जाए।
विधायक ने सरकार और प्रशासन से यह भी मांग की कि कोटला गांव के प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और पुनर्वास हेतु शीघ्र ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को मुआवजा और स्थायी पुनर्वास उपलब्ध कराना जरूरी है ताकि वे फिर से सुरक्षित जीवन जी सकें।



