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सात दिन और आफत की बारिश, रहें सावधान

हिमाचल में बारिश से 302 सड़कें, 436 ट्रांसफार्मर और 254 जल योजनाएं बाधित
भूस्खलन और बाढ़ से अब तक 1,687 घर-गौशालाएं क्षतिग्रस्त, 170 लोगों की मौत
कुल्लू की महिलाओं ने हाथ पकड़कर पार किया उफनता नाला, युवक ने कंधों पर उठाई बाइक


हिमाचल प्रदेश में मानसून की भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गुरुवार सुबह 10 बजे तक राज्य में 302 सड़कें बाधित, 436 बिजली ट्रांसफार्मर बंद, और 254 जल आपूर्ति योजनाएं ठप पाई गईं। सबसे ज्यादा असर मंडी, कुल्लू, चंबा और कांगड़ा जिलों में पड़ा है। मंडी में 193 सड़कें, चंबा और कुल्लू में क्रमशः 142 व 134 ट्रांसफार्मर, और कांगड़ा के धर्मशाला व नूरपुर में 134 जल योजनाएं प्रभावित हैं।

बीती रात कई क्षेत्रों में भारी वर्षा दर्ज की गई, जिसमें धर्मशाला (54.4 mm), मुरारी देवी (52.4 mm), कोठी (49.1 mm) व अन्य स्थान शामिल हैं। मौसम विभाग ने 6 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने और कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

बारिश और भूस्खलन की मार झेल रहे प्रदेश में कई मानवीय जुझारूपन की तस्वीरें सामने आई हैं। चंबा के सलूणी में शिवो देवी का नया मकान भूस्खलन से पूरी तरह ढह गया, जो सरकार द्वारा बनवाया गया था। दुख की बात है कि परिवार गरीब है और उनका आशियाना अब मिट्टी में मिल गया।

चुराह में एक युवक ने भूस्खलन से बाधित सड़क पर अपनी बाइक को कंधे पर उठाकर पार किया, जबकि कुल्लू के बंजार में महिलाओं ने उफनते नाले को एक-दूसरे का हाथ पकड़कर पार किया। ये घटनाएं हिमाचल के लोगों की संघर्षशीलता और अदम्य साहस को दर्शाती हैं।

20 जून से 30 जुलाई के बीच मानसून से राज्य में 170 लोगों की मौत, 278 लोग घायल और 36 अभी भी लापता हैं। इनमें से 76 मौतें सड़क हादसों में हुई हैं। अब तक 1,687 मकान, दुकानें व गोशालाएं, 1,404 पशुओं की मौत, और नुकसान का कुल आंकड़ा ₹1,59,981.42 लाख से अधिक हो गया है।

प्राकृतिक आपदाओं से जूझते इस पहाड़ी राज्य में सरकार, आपदा प्रबंधन टीमें, और आम लोग मिलकर राहत व पुनर्वास में जुटे हैं। आने वाले दिनों में और सावधानी और सतर्कता की आवश्यकता है।