➤मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए हिमाचल ने 30 करोड़ की पहली किश्त लौटाई
➤265 एकड़ भूमि पर डेवलपमेंट में अब तक 150 करोड़ खर्च हो चुके
➤भाजपा प्रवक्ता ने सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल
हिमानी ठाकुर, सोलन
हिमाचल प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के बीच मेडिकल डिवाइस पार्क को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। सोलन जिले के नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र में प्रस्तावित इस पार्क के संदर्भ में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विवेक शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विवेक शर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने हर राज्य को 100 करोड़ रुपये का अनुदान दिया था, ताकि मेडिकल डिवाइस पार्क की जमीन सस्ती दर पर उद्योगपतियों को उपलब्ध कराई जा सके। हिमाचल के हिस्से में भी यह अनुदान आया और पहली किश्त के रूप में 30 करोड़ रुपये जारी हुए। लेकिन प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने यह राशि यह कहकर लौटा दी कि 1 रुपये प्रति वर्ग मीटर जमीन और 3 रुपये प्रति यूनिट बिजली की दरें मंजूर नहीं हैं।
यह पार्क 265 एकड़ भूमि पर बनना प्रस्तावित था और मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष 500 करोड़ रुपये निवेश का आश्वासन दिया था। मगर उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार, भूमि को समतल करने में ही अब तक 150 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। अब प्रति वर्ग मीटर खर्च 1,300 रुपये आंका जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार इसे केवल मूलभूत सुविधा अनुदान के साथ 1 रुपये वर्ग मीटर की दर पर देना चाहती थी।
उद्योग मंत्री डॉ. हर्षवर्धन चौहान ने प्रदेश सरकार से 350 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मांगी है। अन्यथा इसे पीपीपी मॉडल (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) पर ले जाने का सुझाव दिया गया है।
विवेक शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं स्पष्ट नहीं हैं। एक तरफ EV व्हीकल पर 6 रुपये प्रति यूनिट और क्रशर उद्योग पर 2 रुपये प्रति यूनिट सेस लगाया जा रहा है, दूसरी तरफ उद्योग के हित में लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहा। उनका कहना था कि बद्दी में नेशनल ड्रग अथॉरिटी का कार्यालय खोलने का मुद्दा उठाना चाहिए था, ताकि निवेशकों को लाइसेंस और अनुमतियां सहजता से मिलें।
विवेक शर्मा ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार की राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र की योजनाओं को असफल करने की मंशा है। यह सब इस रणनीति का हिस्सा है कि बाद में यह कहकर केंद्र को दोषी ठहराया जाए कि मदद नहीं मिली।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भाखड़ा प्रोजेक्ट से हिमाचल को 12% मुफ्त बिजली देने की मांग की है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में ऊर्जा क्षेत्र में 300 करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया है।
हालांकि, भाजपा का आरोप है कि केंद्र से लगातार सहायता मिलने के बावजूद कांग्रेस सरकार औद्योगिक विकास को राजनीति की भेंट चढ़ा रही है।



