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ग्रामीण क्षेत्रों में व्यावसायिक लीज के लिए धारा 118 अनुमति की बाध्यता नहीं! प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत

➤ ग्रामीण क्षेत्रों में व्यावसायिक लीज के लिए धारा 118 अनुमति की बाध्यता हटाने का प्रस्ताव
➤ 500 वर्गमीटर तक रेरा पंजीकृत प्रोजेक्ट से घर खरीदने वालों को भी छूट
➤ सहकारी समितियों, सरकारी अधिग्रहण और हाउसिंग बोर्ड योजनाओं में कई बड़े बदलाव


हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को महत्वपूर्ण विधायी कार्यवाही देखने को मिली, जब राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने हिमाचल प्रदेश भू अभिधृति एवं भूमि सुधार (संशोधन) विधेयक 2025 सदन में प्रस्तुत किया। यह संशोधन वर्ष 1972 के अधिनियम की धारा 118 में बड़े बदलावों को लेकर आया है।

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार अब ग्रामीण क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भवन या भवन के हिस्से को 10 वर्ष तक किराये या लीज पर देने को धारा 118 से बाहर रखा जाएगा। संशोधन लागू होने पर गैर-कृषक भी गांवों में व्यवसाय, दुकानों, स्टार्टअप और ग्रामीण पर्यटन के लिए बिना किसी अनुमति के भवन लीज पर ले सकेंगे।

विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य या केंद्र सरकार, सरकारी कंपनियों और वैधानिक निकायों द्वारा भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत अधिग्रहीत भूमि धारा 118 के दायरे से मुक्त होगी। पहले यह प्रावधान अस्पष्ट था, जिसे नए संशोधन के माध्यम से स्पष्ट और सुगम बनाया जा रहा है।

राजस्व मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य धारा 118 की मूल भावना—राज्य हित व स्थानीय कृषकों की भूमि सुरक्षा—को बरकरार रखते हुए आधुनिक आर्थिक जरूरतों के अनुरूप लचीलापन लाना है।

कृषक सदस्यों वाली सहकारी समितियों को भूमि खरीदने की अनुमति

विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि पूरी तरह कृषक सदस्यों वाली सहकारी समितियां भूमि खरीद सकेंगी। शर्त यह होगी कि समिति के सभी सदस्य कृषक हों और हर वर्ष रजिस्ट्रार को घोषणा दी जाएगी कि किसी गैर-कृषक को सदस्य नहीं बनाया गया है। नियम तोड़ने पर समिति द्वारा खरीदी गई भूमि राज्य सरकार में निशुल्क निहित हो जाएगी।

हाउसिंग बोर्ड व टीसीपी से खरीदी भूमि पर अब उत्तराधिकारियों को भी छूट

अब तक हिमुडा/टीसीपी योजनाओं से घर खरीदने पर केवल पहले खरीदार को धारा 118 से छूट मिलती थी। नए संशोधन में यह छूट आगामी खरीदारों को भी मिलेगी। स्टांप ड्यूटी वही लागू होगी जो सामान्य गैर-कृषकों के लिए तय है।

रेरा पंजीकृत परियोजनाओं से घर खरीदने वालों को छूट

नया प्रावधान यह कहता है कि अगर कोई गैर-कृषक 500 वर्गमीटर तक का बना हुआ फ्लैट/भवन रेरा-पंजीकृत परियोजना से अपने बोनाफाइड आवासीय उपयोग हेतु खरीदता है, तो उसे धारा 118 की अनुमति नहीं लेनी होगी। यह छूट आगे के सभी खरीदारों पर भी लागू होगी।

भूमि उपयोग: 3 वर्ष अनिवार्य, 5 वर्ष तक एक्सटेंशन

धारा 118 की अनुमति लेकर भूमि खरीदने वालों के लिए 3 वर्ष में भूमि उपयोग अनिवार्य रहेगा। अब सरकार 2 वर्ष की अतिरिक्त अवधि दे सकती है, और उसके बाद एक-एक वर्ष के विस्तार से कुल 5 वर्ष तक छूट दी जा सकेगी।
नियत समय में भूमि उपयोग न करने या उद्देश्य बदलने पर भूमि राज्य सरकार में निहित हो जाएगी।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि धारा 118 में अनावश्यक छेड़छाड़ नहीं की गई है, बल्कि उन मामलों में सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जहां भूमि खरीदार 70 फीसदी कार्य पूरा कर चुके हैं। ऐसे मामलों में जुर्माना लगाकर 1 या 2 वर्ष की एक्सटेंशन देने का प्रावधान विधेयक में शामिल किया गया है।