➤ एचपी बोर्ड ने स्कूलों पर 500 रुपये प्रति छात्र का जुर्माना लगाया
➤ शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
➤ मानसून सत्र के चलते 18 अगस्त से 2 सितंबर तक दफ्तर में रहना होगा
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने छात्रों के व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) और आंतरिक मूल्यांकन (आईएनए) के अंक समय पर न भेजने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अब ऐसी लापरवाही पर स्कूलों को पहले के 100 रुपये के बजाय 500 रुपये प्रति छात्र के हिसाब से जुर्माना भरना होगा। बोर्ड ने यह फैसला हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड अधिनियम 1968 की धारा 19(3) के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए लिया है।
बोर्ड का कहना है कि कई स्कूल निर्धारित समय सीमा के भीतर छात्रों के अंक नहीं भेजते, जिससे परीक्षा परिणाम जारी होने में देरी होती है। इस लापरवाही के कारण कई छात्रों के परिणाम आरएलडी (परिणाम देर से आना) या आरएलई (परिणाम देर से पात्रता) के रूप में घोषित करने पड़ते हैं। बोर्ड सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने कहा कि यह कदम पारदर्शिता बनाए रखने और समय पर परिणाम घोषित करने के लिए आवश्यक है। अगर कोई भी स्कूल, अधिकारी, कर्मचारी, प्रधानाचार्य या संबंधित शिक्षक तय समय पर अंक नहीं भेजता, तो उसे यह नया जुर्माना देना होगा।
वहीं, दूसरी ओर, शिक्षा विभाग ने विधानसभा के मानसून सत्र के मद्देनजर एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। 18 अगस्त से 2 सितंबर तक विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। उच्च और स्कूल शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश के मुताबिक, अधिकारियों और कर्मचारियों को रविवार सहित अन्य छुट्टियों के दौरान भी दफ्तर बुलाया जा सकता है, और उन्हें सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक दफ्तर में रहना अनिवार्य होगा।
इस दौरान उनकी मुख्य जिम्मेदारी विधानसभा में शिक्षा विभाग से संबंधित सभी प्रश्नों का त्वरित और सटीक उत्तर देना होगी। जिन अधिकारियों की छुट्टियां रद्द की गई हैं, उनमें अतिरिक्त निदेशक प्रशासन, कॉलेज और स्कूल के संयुक्त निदेशक, फाइनेंस एंड अकाउंट के संयुक्त निदेशक, विभिन्न उपनिदेशक और सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपल शामिल हैं। विभाग ने इस अवधि में विभागीय पदों की स्थिति, रिक्त पदों, पदोन्नति, स्कूलों और कॉलेजों के निरीक्षण जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी मांगी हैं।



