➤ बिजली बोर्ड प्रबंधन ने कार्यालय परिसरों में प्रदर्शन और गेट मीटिंग पर लगाई रोक
➤ कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले को बताया असंवैधानिक, दी आंदोलन की चेतावनी
➤ संविधान की अभिव्यक्ति की आजादी का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया
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हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड के कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। बोर्ड प्रबंधन द्वारा प्रदेश व क्षेत्रीय कार्यालय परिसरों में कर्मचारियों द्वारा गेट मीटिंग और प्रदर्शन पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ बिजली बोर्ड के कर्मचारी भड़क उठे हैं।
कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले को सीधा-सपाट असंवैधानिक करार दिया है। बिजली बोर्ड कर्मचारियों के जॉइंट फ्रंट महासचिव हीरालाल वर्मा ने कहा कि संविधान हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, और यह आदेश उसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी यदि अपने कार्यालयों में अपनी मांगें नहीं रख सकते, तो फिर कहाँ रखें?
हीरालाल वर्मा ने आरोप लगाया कि प्रबंधन कर्मचारियों को डराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कर्मचारी किसी भी प्रकार के डर के आगे झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि बिजली बोर्ड के कर्मचारी अपने ग्रीवेंस को लेकर बिजली बोर्ड के दफ्तरों में ही प्रदर्शन करेंगे और कोई रोक उन्हें रोक नहीं पाएगी।
वर्मा ने यह भी चेतावनी दी कि यदि यह आदेश वापस नहीं लिया गया, तो पूरे प्रदेश में बिजली बोर्ड कर्मचारी एकजुट होकर बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। बोर्ड प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ जल्द ही राज्य स्तर पर प्रदर्शन और रैली आयोजित की जा सकती है।
यह मामला अब तेजी से गरमाता जा रहा है और राजनीतिक व प्रशासनिक हलकों में भी इसकी गूंज पहुंच सकती है, क्योंकि इससे न केवल कर्मचारियों के अधिकारों का प्रश्न जुड़ा है, बल्कि बोर्ड के कामकाज पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।



