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भरमौर सिविल अस्पताल सहित अन्य केंद्रों में कम से कम 50% स्वीकृत स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए: हाईकोर्ट

  • भरमौर सिविल अस्पताल और आसपास के CHC/PHC में भारी स्टाफ की कमी

  • 65 में से 35 पद खाली, मेडिकल ऑफिसर की 11 में से सिर्फ 2 तैनात

  • हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को 50% स्टाफ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए


शिमला/चंबा, 28 मई 2025: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भरमौर सिविल अस्पताल सहित आस-पास के सीएचसी होली, पीएचसी गरौला, मंधा और जगत में चिकित्सकीय स्टाफ की गंभीर कमी पर चिंता जताते हुए स्वास्थ्य विभाग को सख्त निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव को निर्देश दिया है कि भरमौर सिविल अस्पताल सहित अन्य केंद्रों में कम से कम 50% स्वीकृत स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए, और जहां केवल एक पद स्वीकृत है, वहां तुरंत तैनाती की जाए। न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिकाकर्ता डॉ. जनक राज द्वारा दाखिल रिट याचिका (CWP No. 8378/2025) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

याचिका में कहा गया कि भरमौर, जो कि चंबा जिले का एक जनजातीय क्षेत्र है, वहां लोगों को भारी दुर्गमता और मौसम की कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ का होना अत्यंत आवश्यक है। 31 अप्रैल 2025 तक की स्थिति के अनुसार, भरमौर सिविल अस्पताल में 65 में से 35 पद खाली हैं। 11 स्वीकृत मेडिकल ऑफिसर में से केवल 2 कार्यरत हैं, वह भी 14 सितंबर 2023 से

दंत चिकित्सक का एकमात्र पद 5 सितंबर 2021 से, चीफ फार्मासिस्ट 2016 से, और तीन फार्मासिस्ट तथा तीन फार्मासिस्ट (विंटर) के पद भी खाली हैं। 6 स्टाफ नर्स के पद भी रिक्त हैं। यही स्थिति अन्य पीएचसी और सीएचसी की भी है।

हालांकि राज्य सरकार की ओर से दाखिल उत्तर अभी रिकार्ड पर नहीं है, लेकिन अदालत द्वारा उसके अवलोकन के बाद स्पष्ट किया गया कि उत्तर आश्वस्त करने वाला नहीं है

इस पर न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव को निर्देश दिया है कि भरमौर सिविल अस्पताल सहित अन्य केंद्रों में कम से कम 50% स्वीकृत स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए, और जहां केवल एक पद स्वीकृत है, वहां तुरंत तैनाती की जाए

इस मामले को अब 17 जून 2025 को पालना रिपोर्ट के लिए सूचीबद्ध किया गया है