➤ नागपुर में भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय अधिवेशन को राज्यपाल ने किया संबोधित
➤ युवाओं से मातृभाषा पर गर्व और लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने का आह्वान
➤ ‘विकसित भारत 2047’ के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर दिया जोर
नागपुर में आयोजित भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय अधिवेशन में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया। महर्षि व्यास सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 600 युवाओं ने भाग लिया और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर लोकतांत्रिक विमर्श किया। इस अधिवेशन का आयोजन भारतीय युवा संसद-मीडिया फाउंडेशन और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा और पहचान होती हैं। उन्होंने युवाओं में मातृभाषा को लेकर बढ़ती झिझक पर चिंता जताते हुए कहा कि अंग्रेजी सीखना जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़ी भाषा को भूलना उचित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो युवा अपनी मातृभाषा में सोचते हैं, वे अधिक रचनात्मक, आत्मविश्वासी और सांस्कृतिक रूप से मजबूत होते हैं।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में दिए गए संबोधनों का उदाहरण देते हुए इसे सांस्कृतिक आत्मसम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने हाल ही में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब आधुनिक तकनीकों और विषयों पर भी अपनी भाषा में नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
भारत की समृद्ध भाषाई विविधता—कश्मीरी, डोगरी, पहाड़ी से लेकर तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी, गुजराती और संस्कृत—का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह विविधता ही ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त बनाती है। उन्होंने युवाओं से ‘पंच परिवर्तन’—स्वबोध, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्य—को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को लेकर कहा कि देश के स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत का स्वरूप आज के युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और प्रतिबद्धता से तय होगा। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे खुद को केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सक्रिय भागीदार के रूप में देखें।
उन्होंने सरकार की विभिन्न पहलों—राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया—का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि एक संतुलित, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से सशक्त भारत का निर्माण करना है।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने आयोजनकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि यह मंच भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और युवाओं की आधुनिक आकांक्षाओं के बीच सेतु का कार्य कर रहा है। इससे लोकतंत्र को नई ऊर्जा और दिशा मिल रही है।
इससे पहले राज्यपाल ने नागपुर स्थित स्मृति भूमि में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।



