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राजनीति के नाम पर मर्यादाओं का हनन, हिमाचल के हितों से खिलवाड़ : जयराम ठाकुर

सुक्खू सरकार पर परंपराएं तोड़ने और अव्यवस्था फैलाने का आरोप
यूपीए की तुलना में मोदी सरकार से कई गुना अधिक आर्थिक सहयोग मिलने का दावा
वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश का पक्ष मजबूती से न रखने पर सवाल


शिमला में राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मौजूदा सुक्खू सरकार की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला और व्यवस्था परिवर्तन के दावे को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सुधार के नाम पर प्रदेश की स्थापित व्यवस्थाओं और मर्यादाओं को तार-तार कर दिया है। बजट सत्र जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी स्पष्टता का अभाव दिखाई दे रहा है। परंपरा के अनुसार राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और विस्तृत चर्चा होती रही है, लेकिन इस बार सब कुछ अनिश्चित और असंगठित नजर आया। उनके मुताबिक यह स्थिति प्रदेश के इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई।

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी प्रशासनिक कमजोरियों को छिपाने के लिए केंद्र और पूर्व सरकारों पर दोषारोपण कर रही है। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों पर ठोस निर्णय लेने के बजाय बयानबाजी को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश की जनता भ्रम की स्थिति में है और सरकार की दिशा तथा नीति स्पष्ट नहीं दिख रही।

आर्थिक सहयोग को लेकर उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार और यूपीए शासन की तुलना करते हुए कहा कि आंकड़े स्वयं सच्चाई बयां करते हैं। उनके अनुसार यूपीए के दो कार्यकाल में हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में मात्र 18 हजार करोड़ रुपये मिले, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में यह राशि बढ़कर 78 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि हिमाचल देश के उन राज्यों में शामिल रहा जिन्हें सर्वाधिक राजस्व घाटा अनुदान प्राप्त हुआ। साथ ही केंद्र प्रायोजित योजनाओं में राज्य का अंशदान 10 प्रतिशत किया गया, जिससे प्रदेश को सीधा लाभ मिला।

उन्होंने कहा कि रेलवे, नेशनल हाईवे, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में केंद्र से भरपूर सहयोग मिला है। ग्रांट-इन-एड और टैक्स शेयर के रूप में प्राप्त धनराशि यूपीए काल की तुलना में कई गुना अधिक रही है। ऐसे में केंद्र सरकार पर सहयोग न करने का आरोप लगाना तथ्यों से परे है।

वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान सरकार तीन वर्षों में 45 हजार करोड़ रुपये के कर्ज पर खड़ी है। एक ओर सरकार आर्थिक संकट की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नई नियुक्तियां और भत्तों की घोषणाएं करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि वित्त आयोग और नीति निर्धारण से जुड़े मंचों पर प्रदेश का पक्ष मजबूती से रखने के बजाय राजनीतिक बयान दिए गए, जिससे हिमाचल के हित प्रभावित हुए।

उन्होंने 15वें वित्त आयोग के समय अपनी सरकार द्वारा किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान प्रदेश के पक्ष को तथ्यों और तर्कों के साथ रखा गया था। प्रधानमंत्री और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से संवाद कर हिमाचल की आर्थिक जरूरतों को सामने रखा गया। कोविड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में भी संसाधनों का प्रबंधन किया गया।

जयराम ठाकुर ने कहा कि जो सरकार आपदा के समय प्रभावितों को तिरपाल तक उपलब्ध नहीं करा सकी, वह कोविड जैसी भयावह महामारी की स्थिति को समझने का दावा नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि नई योजनाएं शुरू करने के बजाय कई जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद किया गया। मरीजों को समय पर उपचार और अशक्त लोगों को सहारा पेंशन तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि 2027 तक आत्मनिर्भर और 2032 तक समृद्ध हिमाचल बनाने के दावे करने वाली सरकार अब आर्थिक तंगी का हवाला देकर योजनाओं पर रोक क्यों लगा रही है। यदि प्रदेश की वित्तीय स्थिति कमजोर थी तो तीन वर्षों तक इसे क्यों नहीं सुधारा गया। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि राजनीतिक बयानबाजी छोड़कर प्रदेश के विकास और आर्थिक सुदृढ़ता पर ध्यान केंद्रित करें।