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सियासी दबाव के बाद कंगना ने किया हिमाचल का रुख

➤मंडी में आपदा के बीच कंगना की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल
➤सियासी दबाव के बाद कंगना ने हिमाचल का किया रुख
➤कंगना ने कहा हर हाल में हिमाचल के साथ हूं, जल्द प्रभावित इलाकों में जाऊंगी

ओजस्‍वी चौहान, समाचार फर्स्‍ट



हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा की विभीषिका से सबसे ज्यादा प्रभावित मंडी जिला इन दिनों न सिर्फ राहत कार्य बल्कि सियासी हलचल का भी केंद्र बना हुआ है। पिछले कई दिनों से प्रदेश के नेताओं और अधिकारियों ने प्रभावित गांवों और आपदा स्थलों का दौरा कर स्थिति की समीक्षा की, लेकिन इन सबके बीच मंडी से सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत की अनुपस्थिति ने तीखे सवाल खड़े कर दिए थे। स्थानीय स्तर पर जन प्रतिनिधित्व की सक्रियता को लेकर चर्चाओं और नाराजगी का माहौल बनने लगा था।
इन्हीं चर्चाओं और सियासी उफान के बीच आखिरकार कंगना रनौत ने शुक्रवार को हिमाचल का रुख करने की घोषणा कर दी। कंगना ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा, “I am on my way to Himachal Pradesh, I will be visiting the affected areas soon. Please be rest assured I stand with Himachal Pradesh in every situation. Jai Hind.”


कंगना का यह बयान ऐसे समय आया है जब लगातार सवाल उठ रहे थे कि जिस जिले से वे सांसद चुनी गईं, वहां आपदा की इस विकट घड़ी में उनका कोई संदेश या उपस्थिति सामने क्यों नहीं आई। कांग्रेस के कई नेताओं और स्थानीय लोगों ने भी इस पर कटाक्ष किए थे। अब कंगना की यह घोषणा साफ इशारा करती है कि बढ़ते दबाव और आलोचना को वे नजरअंदाज नहीं कर सकीं।
सूत्र बताते हैं कि कंगना रनौत के हिमाचल पहुंचते ही वे मंडी जिले के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगी और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की जानकारी लेंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे हर परिस्थिति में अपने संसदीय क्षेत्र के साथ खड़ी हैं।
राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यह कदम जन भावनाओं को शांत करने और विपक्ष के हमलों को कमजोर करने की रणनीति भी हो सकता है। हालांकि अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंगना मैदान में कितनी सक्रियता और संवेदनशीलता से अपनी भूमिका निभाती हैं।
इस बीच, सरकार, प्रशासन और सेना के जवान राहत कार्यों में जुटे हुए हैं और प्रभावित गांवों में रसद और मेडिकल सपोर्ट पहुंचाया जा रहा है। जनता को उम्मीद है कि उनके सांसद भी जमीनी स्तर पर सक्रिय योगदान देंगे और सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेंगे।