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जय भोले शंकर: जन्माष्टमी पर छोटे शाही स्नान के साथ हुई शुरू मणि‍महेश यात्रा

मणिमहेश यात्रा जन्माष्टमी पर छोटे शाही स्नान के साथ हुई शुरू
श्रद्धालुओं को प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के तहत डिपोजिट रिफंड स्कीम लागू
फिटनेस टेस्ट अनिवार्य, हेलिकॉप्टर से ऑनलाइन बुकिंग की भी सुविधा शुरू

उत्तर भारत की पावन मणिमहेश यात्रा आज से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई है। जन्माष्टमी पर होने वाले छोटे शाही स्नान के साथ यह यात्रा राधा-अष्टमी यानी 31 अगस्त तक चलेगी। हिमाचल प्रदेश के भरमौर में स्थित समुद्र तल से 13,385 फीट ऊंचाई पर बसे मणिमहेश झील में हर साल लाखों श्रद्धालु भोलेनाथ के दर्शन को पहुंचते हैं।

इस बार यात्रा को लेकर प्रशासन ने कई नई व्यवस्थाएं की हैं। राज्य सरकार ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट के लिए पहली बार डिपोजिट रिफंड स्कीम लागू की है। इसके तहत प्लास्टिक में पैक्ड खाद्य सामग्री पर श्रद्धालुओं को 2, 5 और 10 रुपए अतिरिक्त चुकाने होंगे। उपयोग के बाद जब श्रद्धालु खाली पैकिंग लौटाएंगे, तब उनका पैसा वापस कर दिया जाएगा। इसके लिए 10 कलेक्शन सेंटर स्थापित किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि इससे यात्रा मार्ग पर कचरा नहीं फैलेगा और पर्यावरण संरक्षित रहेगा।

भरमौर प्रशासन के अनुसार, पहले ही दिन करीब 90 हजार श्रद्धालुओं के डल झील में डुबकी लगाने की संभावना है। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश और कश्मीर सहित देशभर से भक्त पहुंच रहे हैं।

यात्रा पर जाने के लिए इस बार फिटनेस टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और कई बार श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ने से मौत भी हो चुकी है। इसलिए केवल फिट श्रद्धालुओं को ही यात्रा पर भेजा जाएगा।

ADM भरमौर कुलविंदर सिंह राणा ने श्रद्धालुओं से प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने और स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने बताया कि इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 100 अतिरिक्त शौचालय भी बनाए गए हैं।

श्रद्धालु इस यात्रा को हेलिकॉप्टर, घोड़े, कुल्ली या पैदल पूरा कर सकते हैं। भरमौर से गौरीकुंड तक हेलिकॉप्टर का एकतरफा किराया 3340 रुपए तय किया गया है जबकि होली से गौरीकुंड तक 4999 रुपए। इसके अलावा कुल्ली और घोड़े का किराया 200 से 1450 रुपए तक तय किया गया है। खास बात यह है कि इस बार पहली बार हेलिकॉप्टर की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी शुरू की गई है।

यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए 500 पुलिस जवान, NDRF-SDRF के 70 सदस्य और सर्च एंड रेस्क्यू टीम तैनात की गई है। इसके अलावा भरमौर, हड़सर, धनछो, सुंदरासी और गौरीकुंड में 5 अस्थायी कैंप लगाए गए हैं, जिनमें मेडिकल टीम और श्रद्धालुओं के रहने-खाने की व्यवस्था की गई है।

मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं मणिमहेश के कैलाश शिखर पर निवास करते हैं। यह यात्रा 9वीं शताब्दी से शुरू हुई थी जब राजा साहिल वर्मन को यहां भगवान शिव के दर्शन हुए थे और उन्होंने मणिमहेश झील पर मंदिर स्थापित किया था।