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कुल्लू की सड़कों पर फूटा रोष, बिजली महादेव रोपवे का विरोध

➤ बिजली महादेव रोपवे के विरोध में कुल्लू की सड़कों पर उतरे लोग
➤ रामशिला से ढालपुर तक रैली, पार्वती घाटी की महिलाएं भी शामिल
➤ मंदिर बंद होने और देव आदेशों से जनता में गुस्सा



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट बिजली महादेव रोपवे को लेकर हिमाचल प्रदेश में तीखा विरोध शुरू हो गया है। शुक्रवार को कुल्लू जिला मुख्यालय ढालपुर में जोरदार रैली निकाली गई। बिजली महादेव संघर्ष समिति की अगुवाई में यह प्रदर्शन रामशिला से शुरू होकर ढालपुर तक पहुंचा, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। खास बात यह रही कि पार्वती घाटी की दर्जनों महिलाएं भी हाथों में बैनर लेकर इस विरोध में आगे आईं। लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रोपवे प्रोजेक्ट को रद्द करने की मांग की।

283 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस रोपवे को केंद्र सरकार ने हरी झंडी दी है, लेकिन स्थानीय लोग इसे देव संस्कृति और पर्यावरण के लिए खतरा मान रहे हैं। समाजसेवी राम सिंह ने धरने में कहा, “बिजली महादेव केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि हमारी आस्था, पहचान और सांस्कृतिक धरोहर है। रोपवे के नाम पर इसे पर्यटन का बाजार बनाना जनभावनाओं के खिलाफ है।”

सबसे बड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि देव आदेशों के चलते मंदिर को छह महीने के लिए आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बंद कर दिया गया है, जो इतिहास में पहली बार हुआ है। इससे स्थानीय लोगों में रोष और चिंता गहराई है।

मंडी के सेरी मंच पर भी इसी दिन एक अलग रोष रैली का आयोजन हुआ, जहां लोगों ने सरकार पर जन भावनाओं की अनदेखी का आरोप लगाया। कुल्लू में प्रदर्शन के दौरान व्यापार मंडल ने भले ही बाजार बंद का एलान नहीं किया, लेकिन दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर प्रदर्शन का समर्थन किया। बंद दुकानों के बाहर लोग हाथ में तख्तियां लेकर बैठे रहे।

इस मुद्दे पर अब सियासत भी तेज़ होती जा रही है। एक ओर केंद्र सरकार इसे क्षेत्र के लिए विकास का जरिया मान रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय जनता इसे आस्था और पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ मान रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद और उग्र हो सकता है।