➤हिमाचल में मानसून से तबाही, 10 के शव मिले और 34 लोग लापता
➤400 सड़कें, 1515 ट्रांसफार्मर, 171 पेयजल योजनाएं ठप
➤7 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट, मंडी में सबसे ज्यादा नुकसान
Himachal monsoon disaster: हिमाचल प्रदेश में मानसून ने इस बार कयामत बरपा दी है। पिछले कुछ दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश के चलते भूस्खलन, सड़कों का टूटना, बिजली और पानी की आपूर्ति ठप होने से जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त है।

हालांकि बुधवार को कुछ राहत रही, लेकिन प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। मौसम विभाग ने 7 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

पिछले 32 घंटों में 10 लोगों की मौत और पांच लोग घायल हुए हैं। अब तक मानसून में मरने वालों की कुल संख्या 50 के पार हो चुकी है। 34 लोग अब भी लापता हैं, जबकि 370 लोगों को अलग-अलग जगहों से रेस्क्यू किया गया है। 11 लोग अब भी फंसे हुए हैं जिनकी तलाश और बचाव जारी है।
प्रदेश में 24 मकान पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और 12 गौशालाएं बह गई हैं। 30 पशुओं की मौत हुई है। मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है।

22 जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं हुईं और कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया।
राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेशभर में 2 नेशनल हाईवे समेत 400 से ज्यादा सड़कें बंद हैं। 1515 ट्रांसफार्मर ठप हो चुके हैं, जिससे कई इलाके ब्लैकआउट में डूबे हुए हैं। 171 पेयजल योजनाएं भी बंद पड़ी हैं। अकेले मंडी जिले में 248 सड़कें और 994 ट्रांसफार्मर ठप हुए हैं। करसोग, थुनाग, गोहर, धर्मपुर जैसे क्षेत्रों में हालात बदतर हैं।
NH-305 पहले से बंद था और अब NH-05 भी किन्नौर के पूर्बनी झूला के पास आई बाढ़ से बंद हो गया है।
एक विद्युत परियोजना भी तेज बारिश और बाढ़ की चपेट में बह गई है।
प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है। सड़कों को खोलने, बिजली और पानी की बहाली तथा फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास जारी हैं।
मुख्यमंत्री ने अपील की है कि लोग अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन से संपर्क करें।



