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कांग्रेस मंत्री चंद्र कुमार के बेटे और पूर्व विधायक नीरज भारती को छह साल के लिए पार्टी से निकाला

कांग्रेस ने नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की सख्त चेतावनी दी

पूर्व विधायक नीरज भारती को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया

कुलदीप राठौर बोले- अनुशासनहीनता करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई


हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से चल रही बयानबाजी और अंदरूनी विवाद के बीच अब पार्टी नेतृत्व ने सख्त रुख अपना लिया है। कांग्रेस की डिसिप्लिन कमेटी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी पदाधिकारी या नेता मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी अथवा अपने ही नेताओं के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करेगा। ऐसा करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

शिमला स्थित राजीव भवन में मंगलवार को आयोजित डिसिप्लिन कमेटी की बैठक के बाद कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता सार्वजनिक मंचों, मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी या उसके नेताओं के खिलाफ टिप्पणी करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

बैठक के दौरान सबसे बड़ा फैसला पूर्व विधायक नीरज भारती को लेकर लिया गया। डिसिप्लिन कमेटी ने चर्चा के बाद नीरज भारती को छह साल के लिए कांग्रेस पार्टी से निष्कासित करने का निर्णय लिया। यह फैसला पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक विवाद और सोशल मीडिया पर उनके बयानों के बाद लिया गया है।

दरअसल, हाल ही में हुए नगर निगम और निकाय चुनावों के परिणामों के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया। चार नगर निगमों में से तीन जगह कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद कृषि मंत्री चंद्र कुमार के पुत्र और पूर्व विधायक नीरज भारती ने सोशल मीडिया पर लगातार कई पोस्ट साझा कर पार्टी नेतृत्व और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

नीरज भारती ने अपने फेसबुक अकाउंट पर दो दिनों के भीतर 20 से अधिक पोस्ट साझा किए। इन पोस्टों में उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया और पार्टी नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने यह भी दावा किया कि हर महीने पांच ब्रीफकेस इकट्ठे किए जाते हैं, जिनमें से तीन दिल्ली भेजे जाते हैं और दो अपने पास रखे जाते हैं। उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया।

इतना ही नहीं, नीरज भारती ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार के दौरान कांग्रेस के लिए संघर्ष करने वाले नेताओं को नजरअंदाज किया गया, जबकि मुख्यमंत्री पद ऐसे व्यक्ति को दिया गया जो चुनाव के दौरान अपने विधानसभा क्षेत्र से बाहर अधिक सक्रिय नहीं था।

नीरज भारती ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह तक लिख दिया कि यदि हिमाचल में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई है तो इसके लिए “दो सुख” जिम्मेदार हैं। इस बयान को मुख्यमंत्री सुक्खू और संगठन के एक अन्य वरिष्ठ नेता पर सीधा हमला माना गया। इसके बाद कांग्रेस के भीतर राजनीतिक घमासान और तेज हो गया।

विवाद तब और बढ़ गया जब मुख्यमंत्री सुक्खू और नीरज भारती के बीच तीखे बयान सामने आने लगे। मुख्यमंत्री ने एक बयान में नीरज भारती को “नशेड़ी” तक कह दिया था, जबकि दूसरी ओर से नीरज भारती लगातार पलटवार करते रहे। इस बयानबाजी ने कांग्रेस संगठन और सरकार दोनों को असहज स्थिति में ला दिया।

इसी बीच नीरज भारती ने प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दिया था। पार्टी ने पहले उनका इस्तीफा स्वीकार किया और बाद में अनुशासनहीनता के आरोपों को देखते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने का फैसला लिया।

नीरज भारती ने यह आरोप भी लगाया कि उनका फेसबुक अकाउंट बंद करवाने के पीछे सरकार की भूमिका है। उन्होंने दावा किया कि अब उन्हें सोशल मीडिया पर सीधे पोस्ट करने के बजाय अपने वीडियो और बयान मीडिया के माध्यम से साझा करने पड़ रहे हैं।

पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के कई नेता भी इस विवाद में खुलकर सामने आए। एचआरटीसी उपाध्यक्ष अजय वर्मा, कांग्रेस महासचिव विनोद जिंटा और अन्य नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नीरज भारती के आरोपों का जवाब दिया। हालांकि विवाद शांत होने के बजाय लगातार बढ़ता गया।

अब डिसिप्लिन कमेटी के फैसले के बाद साफ संकेत मिल गए हैं कि कांग्रेस नेतृत्व पार्टी के भीतर अनुशासन को लेकर किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी के इस सख्त रुख का संगठनात्मक राजनीति पर क्या असर पड़ता है।