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नूरपुर का श्री बृजराज स्वामी मंदिर: श्रीकृष्ण-मीरा की अद्वितीय जुगलबंदी का केंद्र

➤ नूरपुर का श्री बृजराज स्वामी मंदिर श्रीकृष्ण-मीरा की अद्वितीय जुगलबंदी के लिए विश्व प्रसिद्ध
➤ जन्माष्टमी महोत्सव पर हजारों श्रद्धालुओं का आगमन और भव्य फलाहार लंगर का आयोजन
➤ प्राचीन धमेड़ी नगरी का नाम नूरजहां के आगमन के बाद पड़ा नूरपुर



हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर में स्थित श्री बृजराज स्वामी मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। ऐतिहासिक किला मैदान के भीतर स्थित यह मंदिर विश्व में अपनी अनूठी पहचान रखता है, क्योंकि यहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ भक्त शिरोमणि मीरा बाई की प्रतिमा विराजमान है। यह अद्वितीय जुगलबंदी विश्व में कहीं और नहीं मिलती। मंदिर की दोनों प्रतिमाएं इतनी सजीव प्रतीत होती हैं मानो स्वयं श्रीकृष्ण और मीरा बाई भक्तों के सामने उपस्थित होकर आशीर्वाद दे रहे हों।

जन्माष्टमी के अवसर पर यहां का दृश्य देखते ही बनता है। सुबह से ही श्रद्धालु, चाहे वे स्थानीय हों या बाहरी राज्यों से आए हों, लंबी कतारों में दर्शन के लिए खड़े रहते हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में भजन-कीर्तन, शृंगार और दीप सज्जा का दिव्य वातावरण छा जाता है। समाजसेवी स्वर्गीय आर.के. महाजन परिवार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए फलाहार लंगर लगाया गया है, जहां पूरे दिन लोगों को प्रसाद स्वरूप फल, दूध और अन्य व्रताहार वितरित किए जा रहे हैं।

नूरपुर का ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है। प्राचीन काल में इस स्थान को धमेड़ी कहा जाता था। बाद में, जब मुगल बादशाह की बेगम नूरजहां यहां आईं, तो इस जगह का नाम बदलकर नूरपुर कर दिया गया। आज भी यह शहर अपनी सांस्कृतिक धरोहर, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।