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हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है
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प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन, एमएसपी बढ़ोतरी और ब्रांडिंग से किसानों को नई पहचान
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राज्यभर में 2.23 लाख से अधिक किसान जैविक खेती की ओर अग्रसर, 9.61 लाख तक पहुँचाने का लक्ष्य
शिमला, पराक्रम चंद: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि हिमाचल प्रदेश सरकार का लक्ष्य राज्य को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना है, और इसके लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि राज्य की 80% से अधिक जनसंख्या कृषि और बागवानी पर निर्भर है, इसलिए कृषक समुदाय की आर्थिकी को मज़बूत किए बिना आत्मनिर्भर हिमाचल की कल्पना अधूरी है।
प्रदेश सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को व्यापक बढ़ावा दिया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जो प्राकृतिक खेती से उत्पादित फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दे रहा है। उदाहरण स्वरूप – मक्की का एमएसपी 40 रुपये, गेहूं का एमएसपी 60 रुपये प्रति किलो और कच्ची हल्दी का 90 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया है।
‘हिम-भोग हिम-मक्की’ ब्रांड के तहत प्राकृतिक मक्की का आटा सार्वजनिक वितरण प्रणाली और हिम-ईरा पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध करवाया जा रहा है। अब तक 1590 किसानों से 4,000 क्विंटल से अधिक मक्की खरीदी गई और इसके बदले में 1.20 करोड़ रुपये सीधे उनके खातों में भेजे गए हैं। यह पहल न केवल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देती है, बल्कि किसानों को सशक्त भी करती है।
ऊना में 20 करोड़ रुपये की लागत से आलू प्रोसेसिंग प्लांट और हमीरपुर में स्पाइस पार्क की योजना भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी। सरकार प्राकृतिक खेती को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ ‘हिमाचल हल्दी’ नाम से प्रोसेसिंग और विपणन शुरू करने जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में आई थी, कई किसान कर्ज में डूबे थे और जमीन बेचने को मजबूर थे। ऐसे किसानों को राहत देने के लिए ब्याज अनुदान योजना के तहत एकमुश्त निपटान योजना चलाई गई।
अब तक प्रदेश के 2,23,000 से अधिक किसान और बागवान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं, और 9.61 लाख किसानों को इस मुहिम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार कृषकों की उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने, सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने, बीज गुणवत्ता सुधारने, प्रशिक्षण देने और फसल बीमा जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल पारंपरिक कृषि पद्धतियों और आधुनिक बाजार की मांग के बीच की खाई को पाटने का कार्य कर रहा है। इससे हिमाचल प्रदेश एक आदर्श कृषि राज्य के रूप में उभरेगा और देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनेगा।



