➤गुप्त नवरात्र के नवमी पर ज्वालामुखी शक्तिपीठ में पूर्णाहुति व कन्या पूजन संपन्न हुए
➤सवा 11 लाख जाप और 100 दुर्गा सप्तशती पाठ कर विश्व शांति और कल्याण की कामना की गई
➤विधायक संजय रत्न और एसडीएम डॉ. संजीव शर्मा ने मां से प्रदेश की समृद्धि की प्रार्थना की
देहरा, Barjeshwar Saki
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला स्थित विश्वविख्यात शक्तिपीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र का समापन आज विधिवत पूर्णाहुति, हवन यज्ञ, कन्या पूजन और भंडारे के साथ किया गया। इन विशेष नौ दिनों तक चलने वाले धार्मिक अनुष्ठानों में विश्व कल्याण और शांति के लिए सामूहिक साधना संपन्न की गई। समापन कार्यक्रम में विधायक संजय रत्न, एसडीएम डॉ. संजीव शर्मा, मंदिर अधिकारी मनोहर लाल शर्मा, न्यास सदस्य पुजारी दिव्यांशु भूषण दत्त और अश्वनी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन यज्ञ में आहुतियां डाली गईं और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। न्यास सदस्य पुजारी अविनेद्र शर्मा ने जानकारी दी कि इस दौरान गणपति, गायत्री और बटुक भैरव के पांच लाख जाप तथा मां ज्वालामुखी मूल मंत्र के सवा 11 लाख जाप किए गए। इसके अतिरिक्त दुर्गा सप्तशती के 100 पाठ और दशांश हवन कर समस्त अनुष्ठानों को पूर्ण किया गया। उन्होंने बताया कि इस अनुष्ठान का उद्देश्य आपदाओं से राहत, जनकल्याण और विश्व में शांति की कामना करना रहा।

इस अवसर पर विधायक संजय रत्न ने मां के चरणों में प्रदेश, क्षेत्र और जनता के सुख-समृद्धि की कामना की और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया। एसडीएम डॉ. संजीव शर्मा ने हवन में प्रार्थना की कि प्रदेश में हो रही आपदा से प्रभावित लोगों को संबल व राहत मिले।
मंदिर अधिकारी मनोहर लाल शर्मा ने बताया कि गुप्त नवरात्र और मां का प्रकटोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सफाई और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई। समापन के बाद मंदिर शयन भवन में देवी भागवत कथा की पूर्णाहुति भी की गई।
श्री ज्वालामुखी शक्तिपीठ की विशेषता यह है कि यहां मूर्ति नहीं बल्कि धरती से स्वयं निकलती नौ अखंड ज्योतियों को ही मां का स्वरूप माना जाता है। इन ज्योतियों को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका और अंजना देवी के रूप में पूजा जाता है। गुप्त नवरात्र समापन के साथ ही मंदिर परिसर में भव्य भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। यह आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर श्रद्धालुओं में नई आस्था का संबल बना।



