➤ शिमला में फोरलेन निर्माण के खिलाफ हिमाचल किसान सभा ने खोला मोर्चा
➤ नियमों के उल्लंघन से मकानों और खेतों को भारी नुकसान, लोग बेहाल
➤ फैक्टर-2 मुआवजे की मांग और बड़े आंदोलन की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में फोरलेन निर्माण को लेकर गुस्सा लगातार उबाल पर है। कालीबाड़ी हॉल में हिमाचल किसान सभा के बैनर तले आयोजित अधिवेशन में सैकड़ों लोग जुटे और निर्माण में हो रही अनियमितताओं व मनमानी के खिलाफ जमकर विरोध दर्ज कराया। किसान सभा के नेताओं और प्रभावित लोगों ने साफ कहा कि जिस तरीके से बिना योजना और बिना सुरक्षा इंतजाम के दिन-रात भारी मशीनों से कटान और खुदाई का काम चल रहा है, उसने हजारों लोगों की जिंदगी खतरे में डाल दी है।
हिमाचल किसान सभा के राज्य अध्यक्ष कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि फोरलेन परियोजना में नेशनल हाईवे अथॉरिटी और ठेकेदार कंपनियां किसी भी नियम-कायदों को नहीं मान रही हैं। न तो आसपास के घरों को सुरक्षित करने के लिए कोई दीवार बनाई गई, न ही मलबा हटाने की सही व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि शिमला के भट्टाकुफर क्षेत्र में पांच मंजिला इमारत का गिरना प्रशासन की नाकामी और ठेकेदारों की लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज नौ पंचायतों के गांव और बस्तियां फोरलेन की बर्बादी झेल रही हैं। मकान, खेत, बगीचे सब कुछ तबाह हो रहा है और मुआवजे के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं।
सभा में पहुंची अपना आशियाना गंवा चुकी रंजना वर्मा ने भावुक होकर कहा कि वे तो अपना घर और जमीन गंवा चुकी हैं, लेकिन अब वह दूसरों के लिए लड़ाई लड़ेंगी ताकि किसी और का घर मलबे में न दफन हो। उन्होंने कहा, “हमें सड़क चाहिए थी, लेकिन मौत का खौफ नहीं।”
सभा में किसानों और प्रभावित परिवारों ने फैक्टर-2 के तहत उचित मुआवजा देने, निर्माण का काम पारदर्शिता से करने और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई। किसान सभा ने चेतावनी दी कि अगर सरकार और प्रशासन ने प्रभावितों की सुध न ली तो जनांदोलन छेड़ा जाएगा। इसके लिए पंचायत स्तर पर बैठकों का दौर शुरू किया जाएगा।
कुलदीप तंवर ने नेताओं पर भी तंज कसते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि वे अपनी राजनीति छोड़कर लोगों के हक के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा, “यह लड़ाई किसी एक गांव या एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। आज अगर चुप रहे तो कल हम सबका घर-बार छिन सकता है।”
वहीं अधिवेशन में मौजूद ग्रामीणों ने भी फोरलेन निर्माण से हो रही पेयजल स्रोतों की बर्बादी, बगीचों के ध्वस्त होने और आवागमन की दुश्वारियों का दर्द बयां किया। किसान सभा के नेताओं ने साफ किया कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन देंगे और विधानसभा के घेराव का विकल्प भी खुला रखेंगे।



