➤ शिमला में देर रात से भारी बारिश, पेड़ गिरने और भूस्खलन से कई जगह नुकसान
➤ ऊना में मकान की दीवार गिरी, गनीमत रही कोई जानमाल का नुकसान नहीं
➤ मानसून में अब तक 229 लोगों की मौत, 2007 करोड़ का नुकसान
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में देर रात से जारी भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई स्थानों पर पेड़ गिरने और भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ है। विकासनगर में पेड़ गिरने से एक भवन की छत टूट गई और सड़क बंद हो गई। वहीं टूटी कंडी में एक साथ आधा दर्जन से ज्यादा पेड़ गिरने से कई गाड़ियां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, और यहां की सड़क भी बंद हो गई। खालिनी में तड़के करीब 4 बजे ढारा ढहने से 6 मजदूर बाल-बाल बच गए। विकासनगर स्थित हिमुडा कॉलोनी में भी कार पर भूस्खलन हुआ और पेड़ ढह गया।

ऊना जिले में ग्राम पंचायत टकोली के निवासी अजय कुमार पुत्र जगदीश चंद्र के मकान की दीवार भारी बारिश से गिर गई। सौभाग्य से दीवार बाहर की ओर गिरी, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

मानसून में भारी तबाही:
प्रदेश में इस मानसून सीजन में 20 जून से 11 अगस्त तक 229 लोगों की मौत हो चुकी है। 323 लोग घायल हुए हैं और 36 लोग लापता हैं। इस दौरान 116 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई। बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ से 2,388 मकानों व दुकानों को नुकसान पहुंचा है। 1,955 गोशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं और 1,611 पालतु पशुओं की मौत हो चुकी है। कुल नुकसान का आंकड़ा 2007 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
कुल्लू और मंडी जिलों के टनिपरी व टिचना गांव भूस्खलन की जद में हैं। मंडी के टनिपरी गांव में रविवार रात पहाड़ी में बड़ी दरारें आने से ग्रामीण दहशत में आ गए। प्रशासन ने 9 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। कुल्लू के टिचना गांव के 12 परिवार रिश्तेदारों के पास चले गए हैं। मवेशियों के लिए टेंट लगाए गए हैं। इसके अलावा मणिकर्ण घाटी के बरशैणी पंचायत के शिल्हा गांव के नीचे लगातार भूस्खलन जारी है।



