➤ शिमला की चेवड़ी पंचायत के सभी पदाधिकारियों ने शराब ठेका खुलने पर दिया सामूहिक इस्तीफा
➤ सरकार के विरोध के बावजूद खोला ठेका, प्रदर्शन करने वाली महिलाओं पर दर्ज हुई FIR
➤ 12 दिन से चल रहा था विरोध, पंचायत और महिला मंडलों ने जताया रोष
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के बसंतपुर क्षेत्र के खेरा गांव में शराब का ठेका खोले जाने को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों के कड़े विरोध के बावजूद राज्य सरकार द्वारा शराब ठेका खोलने पर चेवड़ी पंचायत के सभी पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया है।

पंचायत प्रधान छविंद्र सिंह पाल, उप प्रधान देसराज और पांच वार्ड मेंबर्स सहित छह महिला मंडल और नशा निवारण कमेटी ने भी अपने पद छोड़ दिए हैं। इन सभी ने सोमवार को संबंधित अधिकारियों को औपचारिक रूप से अपने इस्तीफे सौंपे। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि 23 मई को शराब का ठेका खोले जाने के बाद से गांव का माहौल बिगड़ गया है और ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं में भारी असंतोष है।

12 दिन तक महिलाओं ने लगातार धरना दिया, लेकिन सरकार ने न तो उनकी मांग मानी, न ही ठेका हटाया, उल्टे प्रदर्शन करने वाली महिलाओं पर FIR दर्ज कर दी गई। पंचायत प्रधान ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक व मंत्री विक्रमादित्य सिंह से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों तक सबको कई बार अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद ग्राम सभा बुलाई गई, जहां निर्णय लिया गया कि जब सरकार नशा मुक्ति की बात कर रही है और दूसरी ओर विरोध करने वालों पर मुकदमे दर्ज कर रही है, तो ऐसे माहौल में पद पर बने रहना अनैतिक होगा। पंचायत प्रतिनिधियों ने इसे सरकार की दोहरी नीति करार देते हुए सामूहिक त्यागपत्र सौंप दिया।

अब इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप भी लेना शुरू कर दिया है। पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है, वे जानकारी लेकर प्रतिक्रिया देंगे। वहीं, जिला पंचायत अधिकारी सतीश जम्वाल से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल पाया।



