▪︎ शिमला की दामिनी सिंह बरार ने पीएचडी प्रवेश परीक्षाओं में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की।
▪︎ IIT दिल्ली से करेंगी डॉक्टरेट की पढ़ाई, NIMHANS सहित कई संस्थानों में चयन
▪︎ बिना कोचिंग, केवल स्वअध्ययन से सफलता, युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
पराक्रम चंद, शिमला
संजौली, शिमला की रहने वाली दामिनी सिंह बरार ने भारत की सबसे प्रतिष्ठित पीएचडी प्रवेश परीक्षाओं में शीर्ष स्थान हासिल कर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। दामिनी ने IIT कानपुर की पीएचडी (मनोविज्ञान) प्रवेश परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 प्राप्त की है और IIT दिल्ली की लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार में भी टॉप किया है, जिसके बाद वे अब IIT दिल्ली से डॉक्टरेट की पढ़ाई करेंगी।
इसके अतिरिक्त, दामिनी का चयन भारत के सबसे अग्रणी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान NIMHANS, बंगलौर में भी हुआ है, जहां उन्होंने लिखित परीक्षा पास कर साक्षात्कार के लिए आमंत्रण प्राप्त किया। यही नहीं, दिसंबर 2024 की UGC-NET परीक्षा को उन्होंने अपने पहले प्रयास में, बिना किसी कोचिंग और पूरी तरह स्वअध्ययन से उत्तीर्ण कर दिखाया है—जो उनके दृढ़ आत्मविश्वास और अनुशासन का अद्भुत प्रमाण है।
दामिनी की शैक्षणिक यात्रा शानदार रही है। उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई से एप्लाइड साइकोलॉजी में मास्टर्स किया है, जो देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक माना जाता है। स्नातक की पढ़ाई उन्होंने लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन, दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी ऑनर्स में की थी। बारहवीं कक्षा में वे शिमला क्षेत्र की टॉपर रही थीं।
सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि उनकी यह पूरी यात्रा बिना किसी कोचिंग संस्थान या बाहरी सहायता के पूरी हुई है। दामिनी ने अपने प्रयासों को पूरी तरह स्वतंत्र अध्ययन और आत्म-प्रेरणा के आधार पर संचालित किया है। यह उनके मनोविज्ञान के प्रति जुनून, संघर्ष, और एकाग्रता का प्रतीक है।
दामिनी के पिता राजनीश बरार, नगर निगम शिमला में स्वच्छता निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं और उनकी माता मीरा बरार एक गृहिणी हैं। एक सामान्य पृष्ठभूमि से आने के बावजूद दामिनी ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि केंद्रित प्रयास, आत्मविश्वास और ईमानदारी से किया गया परिश्रम किसी भी चुनौती को पार कर सकता है। उनका यह सफर देश के लाखों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।



