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राजकीय अध्यापक संघ ने उठाई महंगाई भत्ते और पदोन्नति की मांग

  • राजकीय अध्यापक संघ ने डीए एरियर, पदोन्नति और अध्यापक अधिकारों पर उठाई मांग

  • नरोतम वर्मा बोले– वर्ष 2016 से लंबित है महंगाई भत्ते का भुगतान

  • शिक्षकों को गैर-शिक्षकीय कार्यों से मुक्त करने की भी उठाई मांग


शिमला, पराक्रम चंद। राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरोतम वर्मा ने राज्य सरकार से महंगाई भत्ता (DA) का एरियर, छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लंबित भुगतान, तथा लंबे समय से रुकी पदोन्नतियों को शीघ्र जारी करने की मांग की है। शिमला में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान वर्मा ने कहा कि संघ शीघ्र ही मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री से मुलाकात करेगा और शिक्षकों की वर्षों से लंबित देनदारियों को जल्द जारी करने की मांग करेगा

वर्मा ने बताया कि शिक्षकों को 2016 से अब तक डीए का एरियर नहीं मिला है, और छठे वेतन आयोग के अनुसार बकाया भुगतान भी अधूरा है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की पदोन्नतियां, जैसे जेबीटी से टीजीटी, हेडमास्टर से प्रिंसिपल, आदि वर्षों से लंबित हैं, जिससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है। उन्होंने जोर दिया कि समयबद्ध पदोन्नति शिक्षकों का हक है और इससे शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार भी होगा।

संघ ने प्रदेश सरकार से हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के नए अध्यक्ष की शीघ्र नियुक्ति की भी मांग की। वर्मा ने कहा कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्र संख्या में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे सरकारी स्कूलों की साख पर बुरा असर पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी मांग की कि शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य लेना बंद किया जाए, क्योंकि इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। वर्मा ने कहा कि शिक्षकों को सरकारी योजनाओं, सर्वेक्षणों व अन्य कार्यों में लगाने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है और यह छात्रों के हित में नहीं है।

वर्मा ने धरने पर बैठे प्राथमिक शिक्षकों की मांगों को जायज़ ठहराते हुए सरकार से अपील की कि उनकी मांगों को शीघ्र स्वीकार किया जाए, ताकि शिक्षा पर इसका असर न पड़े। उन्होंने राजकीय अध्यापक संघ में गुटबाजी पर बोलते हुए स्पष्ट किया कि उनका गुट ही मान्यता प्राप्त है और वीरेंद्र चौहान गुट पर सवाल उठाते हुए उसे निष्कासित बताया।