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एचजीसीटीए ने शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर काले बिल्ले लगाकर विरोध प्रदर्शन
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शिक्षकों ने यूजीसी ड्राफ्ट रेगुलेशंस 2025 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को खारिज करने सहित कई मांगें उठाईं
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6 अप्रैल को राज्य स्तरीय जनरल हाउस और 29 अप्रैल को जंतर-मंतर पर बड़ा प्रदर्शन करने की घोषणा
College Teachers Protest: ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (एआईएफयूसीटीओ) के देशव्यापी आह्वान पर हिमाचल प्रदेश गवर्नमेंट कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन (एचजीसीटीए) ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में काले बिल्ले लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि सरकारें लगातार उच्च शिक्षा की अनदेखी कर रही हैं और शिक्षकों के हितों को दरकिनार किया जा रहा है।
प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में शिक्षकों ने यूजीसी ड्राफ्ट रेगुलेशंस 2025 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को अस्वीकार करने, शिक्षकों की पदोन्नति, संविदा शिक्षकों के शीघ्र नियमितीकरण, एम.फिल और पीएचडी धारकों को वेतन वृद्धि, प्रोफेसर पद का सृजन, और अध्ययन अवकाश पर पूरा वेतन लाभ देने जैसी मांगें उठाईं। एचजीसीटीए की प्रदेशाध्यक्षा डॉ. बनीता सकलानी ने कहा कि सरकारें उच्च शिक्षा का निजीकरण, व्यावसायीकरण और केंद्रीकरण कर रही हैं, जिससे शिक्षकों और छात्रों को नुकसान हो रहा है।
शिक्षकों ने हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 की कड़ी आलोचना करते हुए इसे शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के लिए हानिकारक बताया। इस अधिनियम के कारण संविदा कर्मचारियों को वरिष्ठता, पेंशन और अन्य लाभों से वंचित किया जा रहा है। शिक्षकों ने लंबे समय से लंबित विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) के शीघ्र आयोजन की भी मांग की, जो पिछले 10 वर्षों से लंबित हैं।
आंदोलन को और प्रभावी बनाने के लिए एचजीसीटीए ने 6 अप्रैल 2025 को राज्य स्तरीय जनरल हाउस बुलाने का निर्णय लिया है, जिसमें आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी। इसके अलावा, 29 अप्रैल को जंतर-मंतर, 27 मई को भुवनेश्वर और 22 जुलाई को वाराणसी में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है।
एचजीसीटीए ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किया जाए, अन्यथा उन्हें आंदोलन को और तेज करना पड़ेगा।



