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शिक्षा मंत्री का बड़ा फैसला: खराब रिजल्‍ट पर 54 प्रिंसिपलों की एसीआर में रेड एंट्री

➤ 25 फीसदी से कम परिणाम वाले शिक्षकों के होंगे तबादले
➤ 54 प्रिंसिपलों की एसीआर में रेड एंट्री के निर्देश
➤ शिक्षा मंत्री ने दिए निरीक्षण और डिजिटल हाजिरी के आदेश

पराक्रम चंद, शिमला



हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के नेतृत्व में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें 25 फीसदी से कम परिणाम देने वाले शहरी स्कूलों के शिक्षकों पर कड़ा एक्शन लेने का निर्णय लिया गया। इस फैसले के तहत ऐसे शिक्षकों को अन्य जिलों में स्थानांतरित किया जाएगा, साथ ही 54 प्रिंसिपलों की एसीआर में रेड एंट्री के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

बैठक में बताया गया कि शैक्षणिक सत्र 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के परिणामों के आधार पर कार्रवाई होगी। सभी जिला उपनिदेशकों से एक माह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। यदि किसी स्कूल का परिणाम लगातार 0 से 25 प्रतिशत के बीच रहता है तो वहां हेडमास्टर, प्रिंसिपल और अन्य शिक्षकों पर भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे और जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर उनकी वार्षिक इंक्रीमेंट भी रोकी जा सकती है। मंत्री ने कहा कि शहरी स्कूलों में बेहतर संसाधन होते हुए भी खराब परिणाम दुर्भाग्यपूर्ण हैं, ऐसे में अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

बैठक में तय हुआ कि हर स्कूल का प्रतिमाह औचक निरीक्षण अनिवार्य किया जाएगा। शिक्षकों से गैर-शिक्षण कार्यों को न्यूनतम किया जाएगा ताकि वे पूरी तरह शिक्षण कार्य पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव का फैसला हुआ। अब बोर्ड परीक्षाएं सुबह 10:00 से 1:00 बजे तक होंगी। परीक्षा केंद्रों के अधीक्षक व उप अधीक्षक रैंडम आधार पर नियुक्त होंगे। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए भी रैंडम चयन प्रणाली अपनाई जाएगी।

बच्चों की संख्या शून्य वाले स्कूलों से स्टाफ को अन्य ज़रूरत वाले स्कूलों में ट्रांसफर किया जाएगा। सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेना अनिवार्य होगा और कोई भी मना नहीं कर सकेगा।

100 फीसदी शिक्षकों को अब डिजिटल हाजिरी देनी होगी और हर माह के अंत में जिला उपनिदेशक इसकी रिपोर्ट देंगे। विद्यार्थियों की उपस्थिति भी विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से दर्ज की जाएगी।

प्रार्थना सभा में स्पेशल डे सेलिब्रेशन कराए जाएंगे, पूरे दिन नहीं। अच्छे शिक्षकों की सूची बनाई जाएगी और उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर अन्य शिक्षक विषय अनुरूप क्लास लेंगे ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।

यह फैसला प्रदेश की शिक्षा गुणवत्ता को सुधारने की दिशा में एक सख्त लेकिन दृढ़ नीति का प्रतीक है, जिससे आने वाले वर्षों में रिजल्ट में सुधार की उम्मीद की जा रही है।