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क्या पता था ये आखिरी सेल्फी है! एक परिवार का सपना, जो हवा में बिखर गया; रुला देगी कहानी

● लंदन में बसने निकली उदयपुर की फैमिली एयर इंडिया हादसे में मारी गई
● डॉ. कोमी व्यास ने दो दिन पहले छोड़ी थी नौकरी, बच्चों संग हो रही थी रवाना
● टेकऑफ के तुरंत बाद हुआ हादसा, सेल्फी बनी आखिरी याद


उदयपुर की एक प्रतिष्ठित महिला डॉक्टर डॉ. कोमी व्यास और उनका पूरा परिवार लंदन में बसने की ख्वाहिश लिए एयर इंडिया फ्लाइट 171 से शुक्रवार को रवाना हुआ था। लेकिन ये सफर कभी मंज़िल तक नहीं पहुंचा। उड़ान भरते ही विमान में तकनीकी खराबी आई और कुछ ही देर में विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसा इतना भीषण था कि किसी की जान नहीं बचाई जा सकी

प्रतीक जोशी, जो पिछले छह वर्षों से लंदन में एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल के रूप में काम कर रहे थे, अपने परिवार – पत्नी डॉ. कोमी व्यास और तीन बच्चों – को अब लंदन बुला रहे थे। सालों से चल रहा इंतजार खत्म हुआ था, और दो दिन पहले ही डॉ. कोमी ने उदयपुर के हॉस्पिटल से इस्तीफा दे दिया था। बच्चों की छुट्टियां शुरू हो चुकी थीं, सामान बंध चुका था और उनका वन-वे टिकट भी बुक हो गया था।

उड़ान से ठीक पहले फैमिली ने एक सेल्फी क्लिक की थी, जिसे उन्होंने अपने नज़दीकी रिश्तेदारों को भेजा था। उस तस्वीर में बच्चों के चेहरों पर खुशी थी, और माता-पिता की आंखों में एक बेहतर भविष्य का सपना। पर किसी को क्या पता था कि वो तस्वीर अब अंतिम स्मृति बन जाएगी।

हादसे के बाद पूरे उदयपुर शहर में शोक की लहर है। जिस अस्पताल में डॉ. कोमी व्यास कार्यरत थीं, वहां के डॉक्टर और स्टाफ गहरे सदमे में हैं। उन्हें एक मिलनसार, समर्पित और संवेदनशील डॉक्टर के रूप में जाना जाता था। उनके जाने से न सिर्फ परिवार उजड़ गया, बल्कि शहर की चिकित्सा सेवा को भी अपूरणीय क्षति पहुंची।

यह दुर्घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। हम हमेशा भविष्य के लिए योजनाएं बनाते रहते हैं, लेकिन जीवन का अगला क्षण भी निश्चित नहीं होता। प्रतीक और कोमी की कहानी बताती है कि हर दिन, हर पल को पूरी तरह जीना चाहिए। खुशियों को टालने की बजाय उन्हें आज ही जी लें, क्योंकि किसे पता कल क्या हो।