Follow Us:

नशे की गिरफ्त में जिंदगी हारी, युवक ने खुद को मारी गोली…..

  • मंडी के दुदर गांव में 38 वर्षीय युवक ने खुद को गोली मारकर की आत्महत्या

  • लंबे समय से नशे की लत और मानसिक तनाव से था पीड़ित, चल रहा था उपचार

  • पुलिस ने आत्महत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की, गन के लाइसेंस की भी हो रही छानबीन


StopDrugAbuse: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में नशे की लत और मानसिक अवसाद ने एक और जान ले ली है। इस बार यह मौत चुपचाप शरीर में ज़हर घुलने से नहीं, बल्कि खुद को गोली मारने से हुई। दर्दनाक घटना मंडी सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दुदर गांव में घटी, जहां 38 वर्षीय मुकेश पटियाल, पुत्र कमलकांत, ने अपने ही घर में रखे हथियार से खुद को गोली मारकर जीवनलीला समाप्त कर ली।

परिजनों की मानें तो मुकेश बीते कई महीनों से नशे की गिरफ्त में था। उसका मानसिक संतुलन डगमगा चुका था और वह अवसाद की स्थिति में जी रहा था। परिवार ने उसका उपचार शुरू कराया था, परंतु नशे की गहराई और मानसिक पीड़ा इतनी प्रबल थी कि उसने इस दुनिया से मुंह मोड़ लिया। यह घटना उस समय हुई जब परिवार के बाकी सदस्य घर में ही मौजूद थे।

पुलिस को दी गई जानकारी में पिता ने बताया कि उनका बेटा नशे की लत और अवसाद से लगातार जूझ रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि जिस गन से मुकेश ने खुद को गोली मारी, वह घर में रखी हुई थी, जिसकी वैधता और लाइसेंस की जांच अब पुलिस कर रही है।

एसपी मंडी साक्षी वर्मा ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस ने भारतीय न्यासिक संहिता की धारा 194 के अंतर्गत केस दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। उन्होंने यह भी बताया कि गन का लाइसेंस, खरीद-फरोख्त, रखरखाव और कानूनी प्रक्रिया की भी छानबीन की जा रही है। मृतक के शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है।

यह घटना समाज में तेजी से फैलती नशे की लत और उसके मानसिक प्रभावों की एक भयानक तस्वीर पेश करती है। हिमाचल प्रदेश जैसे शांत माने जाने वाले राज्य में नशे और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति अब चिंता का विषय बन चुकी है। युवा वर्ग तेजी से नशे की ओर आकर्षित हो रहा है और इलाज, जागरूकता और सही मार्गदर्शन के अभाव में अवसाद का शिकार होकर आत्मघाती कदम उठा रहा है।

इस प्रकार की घटनाएं यह भी बताती हैं कि केवल मेडिकल इलाज काफी नहीं होता, जरूरत है सामूहिक प्रयासों की — जिसमें परिवार, समाज, प्रशासन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक साथ मिलकर समय रहते किसी की जान बचा सकें।