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मंडी के उदित बने लेफ्टिनेंट, संघर्ष की कहानी बनी मिसाल


➤ कोटली डवाहन के उदित पालसरा बने सेना में लेफ्टिनेंट
➤ बचपन में मां का साया खोया, फिर भी नहीं टूटी हिम्मत
➤ दून एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी कर पासआउट हुए

विपलव सकलानी, मंडी


LieutenantUdit: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के उपमंडल कोटली के डवाहन गांव से ताल्लुक रखने वाले उदित पालसरा ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि गांव और प्रदेश का नाम भी गर्व से ऊँचा कर दिया है। उदित की यह सफलता इसलिए भी असाधारण मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने जीवन की कठिन परिस्थितियों को मात देकर यह उपलब्धि हासिल की है।

उदित की उम्र जब महज चार साल थी, तभी उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद उनका पालन-पोषण पिता राजेश कुमार, बड़ी बहन रचना और दादी ने मिलकर किया। राजेश कुमार एक डाटा एंट्री ऑपरेटर हैं, जबकि रचना स्टाफ नर्स हैं। इनका संघर्ष भरा जीवन ही उदित के लिए प्रेरणा बन गया।

उदित ने प्राथमिक से 12वीं तक की शिक्षा आलोक भारती विद्यालय कोटली से प्राप्त की और इसके बाद मंडी कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। जनवरी 2024 में उनका चयन सेना ट्रेनिंग के लिए हुआ था और 14 जून 2025 को उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) से ट्रेनिंग पूरी कर पासआउट किया।

उदित पालसरा ने अपनी सफलता का श्रेय पिता, बहन, दादी और शिक्षकों को दिया है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार का सहयोग और शिक्षकों का मार्गदर्शन न होता, तो यह उपलब्धि संभव नहीं थी। उनकी यह कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो विपरीत परिस्थितियों में भी सपने देखने और उन्हें सच करने की हिम्मत रखते हैं।