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हिमाचल में यूरिया संकट, मक्की और धान की फसल पर मंडराया खतरा

हिमाचल में यूरिया खाद की भारी किल्लत से किसान-बागवान परेशान
नंगल प्लांट से आपूर्ति बंद, 7 हजार मीट्रिक टन की मांग में केवल 1,600 क्विंटल स्वीकृत
मक्की और धान की फसल को खतरा, समय पर खाद न मिलने से विकास रुकेगा



हिमाचल प्रदेश के किसान और बागवान इन दिनों यूरिया खाद की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। बरसात के बाद खेतों में मक्की और धान की फसलों के लिए यूरिया खाद की सख्त आवश्यकता होती है, लेकिन इस बार पंजाब के नंगल प्लांट से आपूर्ति ठप होने के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं।

प्रदेशभर से हिमफेड ने सात हजार मीट्रिक टन यूरिया खाद की मांग भेजी है, लेकिन अब तक केवल 1,600 क्विंटल खाद की ही स्वीकृति मिली है। वह भी अभी तक किसी हिमफेड कार्यालय तक नहीं पहुंच सकी है। इससे नालागढ़, बीबीएन, खेड़ा, ढांग निहली, मझोली, राजपुरा, दभोटा, नंगल, पंजेहरा जैसे क्षेत्रों के किसान खाद की उम्मीद में लगातार चक्कर काट रहे हैं।

किसानों का कहना है कि दो सप्ताह पहले मक्की की बिजाई कर दी गई थी। अब जब घासमार और कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव हो चुका है, तो उसके 3-4 दिन के भीतर खाद डालना जरूरी होता है, लेकिन खाद उपलब्ध न होने के कारण फसलों की ग्रोथ रुकने का खतरा मंडरा रहा है।

खेड़ा के अवतार सिंह, ढांग निहली के सदा राम, मझोली के सुच्चा सिंह, राजपुरा के सर्वजीत सिंह, दभोटा के सुरमुख सिंह, नंगल के टेक चंद और पंजेहरा के राजेंद्र कुमार जैसे किसान हिमफेड के नालागढ़ कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन खाद न मिलने से वे बेहद निराश हैं।

हिमफेड के नालागढ़ स्थित कार्यालय से 1 जुलाई को 7,000 बैग की मांग भेजी गई थी, लेकिन अब तक एक भी बैग की आपूर्ति नहीं हुई है। इस बारे में हिमफेड के एरिया प्रबंधक गौरव ने बताया कि डिमांड भेज दी गई है और जैसे ही खाद आएगी, उसे किसानों में तुरंत बांटा जाएगा।

प्रदेशभर में 7 हजार मीट्रिक टन की जरूरत बताई गई है, और अगर शीघ्र आपूर्ति नहीं हुई, तो खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो सकती हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा।