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अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर बोला हमला, फोर्डो पूरी तरह तबाह

➤ अमेरिका ने ईरान के तीन न्यूक्लियर ठिकानों पर सफल हमला किया
➤ ट्रंप बोले- फोर्डो अब पूरी तरह तबाह हो चुका है
➤ B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स से गहराई में किए गए हमले


मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने शनिवार को ईरान के तीन प्रमुख न्यूक्लियर साइट्स – फोर्डो, नतांज और इस्फहान पर हवाई हमला कर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया है। इस हमले की जानकारी स्वयं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर साझा की।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा – “हमने ईरान में तीन परमाणु स्थलों पर अपना बहुत सफल हमला पूरा कर लिया है, जिसमें फोर्डो, नतांज और इस्फहान शामिल हैं। सभी विमान अब ईरान के हवाई क्षेत्र से बाहर हैं। फोर्डो पर बमों का पूरा पेलोड गिराया गया। हमारे सभी महान अमेरिकी योद्धा अब सुरक्षित लौट रहे हैं। दुनिया में कोई और सेना ऐसा नहीं कर सकती थी। अब शांति का समय है।”

ट्रंप के बयान के अनुसार, सबसे पहला और सबसे बड़ा हमला फोर्डो न्यूक्लियर साइट पर किया गया। यह ठिकाना ईरान के गहोम शहर के पास पहाड़ियों में 60 से 90 मीटर गहराई में स्थित था। 2009 में जब इसका अस्तित्व दुनिया के सामने आया, तभी से अमेरिका और इजरायल की नजर इस पर बनी हुई थी। यहां करीब 3,000 यूरेनियम संवर्धन सेंट्रीफ्यूज लगाए गए थे, जो ईरान की न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं का केंद्र माने जाते थे।

ट्रंप ने अपने पोस्ट में स्पष्ट लिखा – “FORDOW IS GONE”, यानी फोर्डो अब तबाह हो चुका है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला स्थानीय समय अनुसार रात 2:30 बजे किया गया और भारतीय समयानुसार रविवार सुबह 7:30 बजे ट्रंप ने इसे सार्वजनिक किया। हालांकि अमेरिका की ओर से हमला करने के तरीके का औपचारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन में अत्याधुनिक B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स का इस्तेमाल किया गया। इन विमानों से 30,000 पाउंड वजनी GBU-57 बम गिराए गए, जो खासतौर पर जमीन के भीतर स्थित ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए बनाए गए हैं।

ईरान के इन तीन ठिकानों – फोर्डो, नतांज और इस्फहान – में से फोर्डो सबसे संवेदनशील और गहराई में था। इसे तबाह करना एक सैन्य-सामरिक चमत्कार माना जा रहा है।

गौरतलब है कि अमेरिका ने हाल ही में ईरान को दो सप्ताह का समय दिया था, जिसमें अपेक्षा थी कि बातचीत या रणनीतिक दबाव से समाधान निकलेगा। लेकिन अब अचानक हमला करके अमेरिका ने नया संदेश दे दिया है।