-
अमेरिका ने स्टूडेंट वीज़ा प्रक्रिया में शामिल की सोशल मीडिया प्रोफाइल की पांच साल की जानकारी
-
भारतीय छात्रों में तनाव, पुराने पोस्ट डिलीट करने का चलन शुरू
-
फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब सहित कई प्लेटफॉर्म पर देना होगा यूज़रनेम
USVisaRules: अमेरिका में उच्च शिक्षा की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को अब वीजा प्रक्रिया के दौरान अपनी सोशल मीडिया गतिविधियों को पारदर्शी बनाना अनिवार्य करना होगा। अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि स्टूडेंट वीज़ा के लिए आवेदन करते समय छात्रों को पिछले पांच वर्षों में उपयोग किए गए सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यूज़रनेम बताने होंगे।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के छात्रों पर पड़ रहा है, जहां से हर साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी अमेरिकी यूनिवर्सिटीज़ में दाखिला लेते हैं। ट्रंप प्रशासन द्वारा शुरू की गई इस नीति को अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसके तहत फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, रेडिट, टिकटॉक जैसे सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
भारतीय छात्र इस फैसले से घबराए हुए हैं, और अपने पुराने पोस्ट, राजनीतिक टिप्पणियों, मीम्स और तस्वीरों को डिलीट करने लगे हैं, ताकि कोई भी विवादास्पद या गलत संदर्भ वाली सामग्री उनके वीजा आवेदन में बाधा न बने। कई छात्रों को डर है कि कोई भी मजाकिया पोस्ट या राजनीतिक राय वीज़ा रिजेक्शन का कारण बन सकती है।
एजुकेशन कंसल्टेंट्स अब छात्रों को सोशल मीडिया पर सजग रहने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर की गई किसी भी अनुचित गतिविधि की कीमत छात्रों को वीज़ा अस्वीकृति के रूप में चुकानी पड़ सकती है।
हालांकि अमेरिका के इमीग्रेशन अधिकारियों का दावा है कि यह कदम केवल सुरक्षा कारणों से उठाया गया है और जांच केवल संदिग्ध गतिविधियों और प्रोफाइल्स तक सीमित होगी। लेकिन इस नए नियम से भारत में अमेरिका की उच्च शिक्षा को लेकर बना उत्साह कुछ हद तक मंद होता नजर आ रहा है।



