➤ महाराणा प्रताप जयंती समारोह में मुख्यमंत्री ने उनके साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति को बताया प्रेरणास्रोत
➤ पठियार स्थित महाराणा प्रताप इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में इंडोर स्टेडियम के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा
➤ युवाओं से त्याग, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जिला कांगड़ा के धर्मगिरि पठियार में आयोजित महाराणा प्रताप की 487वीं जयंती समारोह में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें त्याग, स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक बताया। इस अवसर पर उन्होंने महाराणा प्रताप इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, पठियार में इंडोर स्टेडियम के निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा भी की। इस दौरान पर्यटन विकास निगम के चैयरमेन आरएसबाली और राजसभा सांसद अनुराग शर्मा भी मौजूद रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक वीर योद्धा ही नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी और सिद्धांतवादी नेतृत्वकर्ता भी थे। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आत्मसम्मान और स्वतंत्रता से कभी समझौता नहीं किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध आज भी साहस, बलिदान और सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष की मिसाल बना हुआ है।
उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी को महाराणा प्रताप के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए त्याग, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। इससे राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और देशभक्ति की भावना को और मजबूती मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सुशासन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, ग्रामीण विकास, कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से हिमाचल को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश की गौरवशाली सैन्य परंपरा का उल्लेख करते हुए मेजर सोमनाथ शर्मा, कर्नल डी.एस. थापा, कैप्टन विक्रम बत्रा और सूबेदार मेजर संजय कुमार जैसे वीर सैनिकों के बलिदान को नमन किया। साथ ही ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जुब्बल के फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शवीर सिंह ठाकुर द्वारा दिखाए गए साहस की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना का रास्ता साफ हो गया है। परियोजना पूर्ण होने पर हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होगी, जिससे करीब 600 करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व मिलने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि सरकार प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से पक्ष रख रही है। ग्रीन बोनस, शानन परियोजना, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के बकाया और अन्य वित्तीय मामलों को लेकर भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना मामले में प्रदेश के पक्ष में आए न्यायालय के निर्णय का भी उल्लेख किया, जिससे राज्य को हर साल लगभग 150 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय होगी।

शिक्षा क्षेत्र में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल कर देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई, राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल, सीबीएसई पाठ्यक्रम और हजारों शिक्षकों की भर्ती जैसे कदमों से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिली है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 680 करोड़ रुपये की राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना शुरू की गई है। योजना के तहत ई-टैक्सी खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जा रही है। वहीं सौर ऊर्जा परियोजनाओं और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में लगभग 3,000 करोड़ रुपये के निवेश का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में आधुनिक मशीनें और रोबोटिक सर्जरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, ताकि लोगों को बेहतर उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े।
नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान’ शुरू किया है। इसके तहत सूचना देने वालों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी और उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि आगामी ‘खेलो इंडिया चिट्टा-मुक्त अभियान’ के माध्यम से युवाओं को खेलों और स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया तथा स्मारिका का विमोचन भी किया। समारोह में प्रदेश सरकार के कई मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने धर्मशाला स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा 70 लाख रुपये की लागत से पुनर्विकसित फव्वारा चौक तथा पुराने एचआरटीसी कार्यशाला परिसर में 11.90 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दो मंजिला ई-बस चार्जिंग डिपो एवं अनुरक्षण केन्द्र का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने सतत् शहरी विकास तथा आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए धर्मशाला में सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ बनाने के लिए तीन नए इंट्रा-सिटी ई-बस मार्गों को भी स्वीकृति प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि फव्वारा चौक के पुनर्विकास का उद्देश्य कोतवाली बाजार में यातायात को सुचारु बनाना, क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखना तथा इसे एक आकर्षक सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित करना है। परियोजना के तहत सड़क के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध करवाने के लिए फव्वारे और शहीद-ए-आजम भगत सिंह की प्रतिमा का पुनर्स्थापन किया गया है, जबकि रामलीला मंच और फव्वारा क्षेत्र को एकीकृत सार्वजनिक प्लाजा के रूप में विकसित कर भूमि के बेहतर उपयोग और यातायात प्रबंधन को सुनिश्चित किया गया है।
उन्होंने कहा कि नव विकसित फव्वारा चौक में पारंपरिक स्थानीय शैली की भिक्ति चित्रकारी, वैरिएबल मैसेजिंग सिस्टम, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, पर्याप्त बैठने की सुविधा तथा आकर्षक केन्द्रीय फव्वारा स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि स्थानीय विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक शहरी आधारभूत ढांचे के विकास की यह परियोजना राज्य सरकार के विकास केन्द्रित दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है तथा इससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
ई-बस चार्जिंग डिपो एवं अनुरक्षण केन्द्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्याधुनिक सुविधा स्वच्छ, विश्वसनीय एवं पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी इसी प्रकार की चार्जिंग अवसंरचना विकसित की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने धर्मशाला स्मार्ट सिटी लिमिटेड तथा हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह नई सुविधा इलेक्ट्रिक बसों के संचालन एवं अनुरक्षण को और अधिक प्रभावी बनाएगी तथा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस अवसर पर आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादविन्द्र गोमा, सांसद अनुराग शर्मा, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, धर्मशाला नगर निगम के पूर्व महापौर देवेन्द्र जग्गी, एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, एपीएमसी अध्यक्ष निशु मोंगरा, उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक अशोक रतन सहित अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।
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