क्या शहीद तिलक राज की अंतिम इच्छा पूरी होगी, निगाहें टिकी जयराम सरकार पर

  • 14 Feb 2020
  • Reporter: नवनीत बत्ता

14 फरवरी 2019 के दिन भारत के 40 सैनिक आंतकवादी हमले में पुलवामा में शहीद हुए थे उन्हीं में से एक सैनिक हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के थेवा गांव से भी था। जब तिलक राज की शहादत की सूचना मिली तो पूरे प्रदेश में गमगीन सा माहौल हो गया और प्रदेश के बड़े-बड़े राजनेता शहीद के घर तिलकराज को श्रद्धांजलि देने और उसके परिवार को ढांढस बढ़ाने के लिए पहुंचने लगे। अब 1 साल पूरा हो गया है तो क्या सरकार ने परिवार के साथ किए सभी वादे पूरे किए और आज परिवार किस  स्थिति में है। इसको लेकर जब हमने तिलक राज की पत्नी सावित्री से बात की तो उसने बताया कि तिलक राज का बड़ा बेटा वरुण कपूर जो अब 3 साल का हो चुका है और पिछले साल से ही  स्कूल जाने लगा है। जबकि विवान कपूर अभी सिर्फ 1 साल का है। जिसने अपने पिता का सिर्फ नाम ही सुना है। उन्होंने कहा कि वैसे तो सरकार ने निजी तौर पर उनके साथ जो वादे किए थे वह पूरे कर दिए जिसमें उनको सरकारी नौकरी मिलना और अन्य वित्तीय लाभ आते हैं लेकिन गांव के ही स्कूल को अपग्रेड करने की बात सरकार ने की थी जिसे अपग्रेड भी कर दिया गया लेकिन अब जब अगली क्लास यहां पर बैठने है लेकिन ऐसे में स्कूल में बच्चों को बिठाने के लिए कमरे ही नहीं है। जिस का प्रबंध सरकार को समय से करना चाहिए था।

सावित्री ने कहा कि आज तिलक राज को शहीद तिलकराज युवक क्लब की तरफ से श्रद्धांजलि भी दी जा रही है। जिसमें गांव के युवा शहीद तिलकराज युवक क्लब के बैनर तले देवा से कोटला तक 30 किलोमीटर लंबी यात्रा करेंगे और शहीद को श्रद्धांजलि देंगे। उन्होंने कहा कि तिलक की अंतिम इच्छा जिसको लेकर वह अक्सर चर्चा करते थे कि हमारे इलाके में कोई बड़ा खेल का मैदान नहीं है सिर्फ स्कूल का ही एक छोटा सा मैदान है। जहां पर खेल पाना आसान नहीं होता है। क्योंकि बरसातों के समय पानी भर जाता है। तिलक राज अक्सर कहा करते थे कि गांव में एक बढ़िया सा मैदान होना चाहिए और एक तरह से यह एक उनकी अंतिम इच्छा  भी थी। उन्होंने कहा कि तिलकराज क्यों खुद इसके लिए पैरवी की थी और स्थानीय राजनीतिक लोगों से मिलकर मैदान की बात भी रखी थी और अब इस पूरे इलाके के लोगों की यह इच्छा है कि एक मैदान यहां पर हो जहां पर इलाके के बच्चे खेल सके। इसी के साथ उन्हें सरकार से मलाल भी है कि तिलक राज के नाम का एक गेट स्कूल के बाहर बना जरूर है। लेकिन  सिर्फ टीन के पत्र पर शहीद का नाम लिखा है जिसको लेकर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि शहीद का सम्मान ठीक ढंग से होना चाहिए और इसको सीमेंटेड गेट के तरीके के साथ जैसे लिखा जाता है। उसी तरह लिखा जाना चाहिए।

वहीं, इस मामले पर कांग्रेस के बरिस्ट नेता जीएस बाली का कहना है आज शहीद तिलक राज की सहादत को एक साल पूरा होगा और सरकारों को इनके साथ किये हर बादे को समय पर पूरा करना चाहिए ,वो चाहे परिवार से जुड़े हों या समाज से शहीद के परिवार को शहीद के नाम का टीन का पत्र पर नाम लिखने पर आपत्ति होना सही बात है और एक संदेश शहीदों के सम्मान को लेकर इससे जाता है। इसलिए सरकारों को चाहिए कि वह शहीदों के नाम पर किस तरह के काम संबंधित इलाकों में होने चाहिए उसके लिए एक नियम ही बना दें।  शहीद तिलक राज की अंतिम इच्छा की जहां तक बात है तो हर पंचायत में एक बढ़िया खेल का मैदान हो यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है ताकि हमारे युवा नशे जैसी लत से अपना ध्यान हटाकर खेलों की तरफ ध्यान दें और मैं निजी तौर पर कह सकता हूं कि पूरा प्रयास परिवार के साथ मिलकर उनकी इस इच्छा को पूरे करने में करूंगा।