छोटा हरिद्वार उपनाम से जाना जाता है सदाशिव ध्यूंसर महादेव मंदिर

  • 14 Jun 2020
  • Reporter: पी. चंद, शिमला

जिला ऊना मुख्यालय से 31 किलो मीटर अंब उपमंडल तहसील मुख्यालय से 27 किलो मीटर बंगाणा तहसील से 29 किलोमीटर दूर स्थित सदाशिव ,ध्यूंसर महादेव प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है जिसे छोटा हरिद्वार उपनाम से भी जाना जाता है। ऊना का सदाशिव महादेवन धार्मिक पर्यटन स्थल है।इस स्थल के लिए आज दिन तक सीधी बस सुविधा ना होना बहुत बड़ी दुविधा है। विभिन्न सरकारों ने आज तक इस स्थल को विकसित करने में कोई भी कारगर अथवा रचनात्मक साकारात्मक सहयोग नहीं दिया है। आज भी मूलभूत सुविधाओं से बंचित यह धार्मिक पर्यटन स्थल बदहाली का शिकार है।

इस प्राचीन स्वयम्भू शिवलिंग का साकार पांडवकालीन पांच हजार साल पूर्व पांडव राजपुरोहित धौम्य ऋषि ने किया था। यह धौम्य ऋषि के नामानुसार कालान्तर में "श्री ध्यूंसर महादेव"की तपस्थली नाम से ही जाना जाता है। सदाशिव महादेव को विकसित करवाने के लिए सर्वप्रथम एक तो यहां हर साल आयोजित महाशिवरात्री उत्सव को ऊना का सबसे बड़ा मेला बनवाना भी एक स्वप्न ही बना रहा। जबकि सदाशिव से जुड़े हजारों श्रद्धालुओं को आशा थी कि सर्व सुलभ ध्यूंसर महादेव को ट्राली परियोजना से चिंतपूर्णी और ऊना से जोड़ा जा सकता था। यह अत्यंत दुखद एवं विचारणीय है कि सदाशिव मंदिर के पुराने जर्जर पौड़ियों वाले रास्तों को भी सरकार ठीक नहीं करा पाई।

सरकार ने मंदिर अधिग्रहण प्रक्रिया को जबरन ठूंसने का रास्ता अख्तियार किया। हकीकत यही है कि ऊना के धार्मिक पर्यटन स्थल जिसे छोटा हरिद्वार महातीर्थ के नाम से भी जाना जाता है यहां के लिए धार्मिक पर्यटकों को कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई। आज दिन तक ऊना मुख्यालय, अंब उपमंडल तहसील मुख्यालय औऱ तहसील मुख्यालय बंगाणा से कोई भी सीधी बस सेवा उपलब्ध नहीं करवाई जा सकी। यह बहुत बड़ी समस्या रही कि दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए परिवहन विभाग एक अदद सरकारी बस सुविधा बहाल नहीं करा पाया। विभिन्न सुविधाओं का अभाव रहा और सदाशिव महादेवन आने वाले श्रद्धालुओं को अपने निजी बाहनों औऱ किराये-भाड़े के बाहनों पर आकर अपनी अपार श्रद्धा की कीमत चुकानी पड़ती है।

यह हिमाचल प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन ऊना की सबसे बड़ी फजीहत है। नूतन साल में माघ मास महात्यम चौदह जनवरी से बारह फरवरी तक चलेगा किंतु यहां धार्मिक श्रद्धालुओं को 14 जनवरी से 12 फरवरी और  21 फरवरी महाशिवरात्रि पर्व को भी यहां पहुंचने में दुविधाओं का सामना करना पड़ेगा। धार्मिक पर्यटन स्थलों को सरकार द्वारा सुविधाओं को प्रदान करने की घोषणाएं महज एक छलावा है। पर्यटन स्थल के तौर पर बढ़ावा दिलवाने हेतु आज भी सदाशिव महादेवन विषमताओं से जूझ रहा है। यहां कई बहुआयामी योजनाओं को साकार किया जा सकता था किंतु सरकारों ने सदैव ही इस धार्मिक पर्यटन स्थल की उपेक्षा की है।  

एनएसएस और एनसीसी के कैम्प आयोजित होते रहे

यहां पर आये दिन भारत स्काउट गाइड एनएसएस और एनसीसी के कैम्प आयोजित होते रहे हैं। विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों औऱ कालेज के हजारों विद्यार्थियों को इस स्थल पर पहुंच कर लाभ और सूकुन मिलता रहा है। सरकार की इच्छा शक्ति प्रबल होती तो यहां समीप उपलब्ध सरकारी वन विभाग की जमीन पर विश्राम गृह, टूरिस्ट कैफे भी स्थापित किया जा सकता था। सदाशिव महादेवन के मुख्य द्वार पर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए एक शापिंग काम्प्लेक्स का निर्माण शीघ्रातिशीघ्र करवाया जाना चाहिए। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ कई बेरोजगार युवाओं को शापिंग काम्प्लेक्स से रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है।

सदाशिव को डेरा बावा बड़भाग सिंह मैड़ी और डेरा बावा रुद्रानंद आश्रम से जोड़े जाने की अपार संभावनाएं हैं तथापि सदाशिव महादेवन समीप संस्कृत महाविद्यालय स्थापित करवाने की पुरजोर मांग पर भी हमें युद्ध स्तर पर मुकम्मल अमली जामा पहनाना होगा। सदाशिव महादेवन को टिम्बर ट्राली से शक्ति पीठ माता चिंतपूर्णी, छिन्न मस्तिकाधाम को जोड़ने की अपार संभावनाएं हैं। यही नहीं सदाशिव महादेवन को धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित और विकासशील पर्यटन का सिरमौर बनाने की गर्ज से भी यहां विभिन्न संभावनाओं की तलाश करनी चाहिए।