शिमला: प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण के विरोध में उतरी तीन पंचायतें

  • 01 Mar 2021
  • Reporter: पी. चंद

रविवार को नगर निगम शिमला के भरयाल स्थित कचरा संयंत्र की लैंडफिल साइट के लिए भारत सरकार द्वारा स्थानांतरित 9.9 हैक्टेयर वन भूमि पर प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के विवाद को लेकर तीन पंचायतों, टुटू - मजठाई, रामपुर क्योंथल और बागी के ग्रामीणों, नगर निगम के अधिकारियों तथा टुटू एवं मजयाट के  पार्षदों के बीच कचरा संयंत्र स्थल पर वार्ता हुई । बताता चलें कि नगर निगम द्वारा उपरोक्त स्थान पर टुटू और मजयाट वार्डों के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण का प्रस्ताव है, जबकि उपरोक्त पंचायतों के लोग इसके निर्माण का विरोध कर रहे है ।

ग्रामीणों का तर्क है कि वे पहले से ही कचरा संयंत्र के पास खुले में पड़ी हजारों टन असंसाधित गन्दगी के ढेरों से परेशान है और ऊपर से नगर निगम द्वारा प्रस्तावित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण से उनका जीना ओर दूभर हो जाएगा । प्रभावित ग्रामीणों द्वारा कचरा संयंत्र के विरोध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एन.जी.टी)  और सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2011 में याचिका दायर की थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में नगर निगम को कचरा संयंत्र के निर्माण से पूर्व सम्बन्धित ग्राम पंचायत से एनओसी ना लेने सहित अन्य आवश्यक ऑपचारिक्ताओं से सम्बन्धित कई खामियों के लिए दोषी पाया था ।

परंतु नगर निगम द्वारा एन.जी.टी को कचरा संयंत्र के अति आधुनिक तकनीक युक्त और प्रदूषण रहित होने के लिखित आश्वासन के बाद केस को यह कह कर ख़ारिज कर दिया था कि नगर निगम कचरा संयंत्र को चालू करने से पूर्व मियुनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2000 में वांछित सभी ऑपचरीक्ताओं को सुनिश्चित करेगा ।  परंतु नगर निगम द्वारा सबंधित ग्राम पंचायत की आपति को नज़र अंदाज़ करके तथा अन्य आवश्यक ऑपचरिक्ताओं को पूरा किए बगैर संयंत्र को चालू कर दिया गया था। यह कचरा संयंत्र इसकी स्थापना से आज तक सुचारू रूप से काम ना करने और असंसाधित गन्दगी के कारण विवादों में रहा है ।

नगर निगम के अधिकारियों के साथ आए स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. चेतन चौहान द्वारा लैंडफिल साइट पर अस्पताल के बायोवेस्ट खुले में पड़े होने की मौखिक पड़ताल के उत्तर में वहां काम पर लगे जेसीबी ऑपरेटर ने इसे कोविड-19 के मरीजों से सम्बन्धित होने का खुलासा किया। स्वास्थ्य अधिकारी ने इस बारे जेसीबी ऑपरेटर को अपने पूर्व निर्देशों का हवाला देते हुए कोविड -19 के बायोवेस्ट को अलग से नष्ट ना करने पर आक्रोश व्यक्त किया । इस खुलासे से संयंत्र के आसपास के गांव वासियों में दहशत का माहौल बना हुआ है ।

ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी बहुत आक्रोश है कि परवाणु - शिमला फोर लेन के लाखों टन मलवे को नगर निगम, भारत सरकार  द्वारा कचरा संयंत्र के वेस्ट को डंप करने के लिए स्थानांतरित वन भूमि पर अनाधिकृत ढ़ंग से फेंकवा रहा है जिसके एवज में फोर लेन के ठेकेदारों से लाखों रुपए की राशि वसूल की जा रही है । इस लाखों टन फोर लेन के मलवे से भविष्य में कचरा संयंत्र के निचली ओर बसे गांवों और कृषि भूमि तथा जल स्त्रोतों के नष्ट होने के बहुत संभावना बन गई है ।  इतना ही नहीं फोर लेन के मलवे से ग्रामीणों की घासनी दबा दी गई है, जिसको लेकर ग्रामीणों में बहुत क्रोध है । 

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के प्रस्ताव का विरोध कर रहे ग्रामीणों में ग्राम पंचायत टुटू - मजठाई के वरिष्ठ नागरिक उत्तम सिंह कश्यप का कहना है कि बेशक जिस स्थान पर प्लांट का निर्माण प्रस्तावित है वो भूमि नगर निगम के नाम है, परन्तु भारत सरकार ने यह वन भूमि लैंडफिल साइट के लिए स्वीकृत की है । दिनांक तीन फरवरी 2010 को भारत सरकार के स्वीकृति पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि लैंड फिल साइट के लिए स्वीकृत भूमि किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग में नहीं लाई जाएगी । उत्तम कश्यप ने बताया कि मियुनिसिपल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2000 के अनुसार कचरा संयंत्र के साथ लैंडफिल का होना एक जरूरी शर्त है, इसलिए नगर निगम द्वारा लैंडफिल साइट के लिए चिन्हित भूमि पर  सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया जा सकता । उन्होंने आगे बताया कि यदि नगर निगम मनमाने  और अनाधिकृत ढ़ंग से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करता है तो सभी प्रभावित पंचायतें मिलकर मामले को न्यायलय में ले जाएंगे ।