महेंद्र सिंह ठाकुर के साथ रहकर झूठ बोलना सीख गए मुख्यमंत्री: कौल सिंह ठाकुर

  • 16 Apr 2021
  • Reporter: बीरबल शर्मा

कांग्रेस के पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कदम-कदम पर भ्रष्टाचार से समझौता कर रहे हैं। कोविड काल में मास्क और सैनेटाइजर तथा वेंटिलेटर की खरीद में बहुत बड़ा घोटाला हुआ है। क्या कारण रहे कि डॉ. राजीव बिंदल को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। भाजपा के ही लोगों की ओर से जारी पत्र बम में भी वही आरोप लगे हैं जो हमने लगाए हैं। ये बात मंडी में कौल सिंह ठाकुर ने पत्रकारों के सामने कही।

कौल सिंह ने कहा कि यह सरकार ऐसी है कि जो शिकायत करता है उस पर ही मुकदमा दर्ज करती है। मुख्यमंत्री की धमकी से कोई डरने वाला नहीं है। जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री पद का अहंकार हो गया है, यह ठीक नहीं रहेगा। जलशक्ति मंत्री अब हर समय मुख्यमंत्री के साथ रहते हैं। अब तो महेंद्र सिंह ने जयराम को झूठ बोलना सीखा दिया। जयराम ठाकुर सार्वजनिक मंचों पर भाषा के इस्तेमाल में मर्यादा का उलंघन्न कर रहे हैं।

 उन्होंने कहा कि कौन भ्रष्टाचारी है यह हिमाचल की जनता जानती है। उन्होंने चुनौती दी है कि हिम्मत है तो मुख्यमंत्री चार्जशीट पर कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री सबूत की बात कर रहें है तीन साल तक सबूत क्यों छिपा रखे, भाजपा की ओर से जारी की गई चार्जशीट उस पर कार्रवाई करते हुए जांच करे। भाजपा की डब्बल इंजन की सरकार हिमाचल में एक मेडिकल कालेज लाकर तो दिखाए।

लापरवाही से हिमाचल में फैल रहा है कोरोना

कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की लापरवाही की वजह से कोरोना फैल रहा है। राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस के अवसर पर भीड़ बुलाने करने की क्या आवश्यक्ता थी। वहीं पर मुख्यमंत्री को मास्क पहन कर भाषण देना चाहिए था। निजी कार्यक्रमों पर तो एसओपी लागू कर दी है। मगर सरकारी व राजनैतिक कार्यक्रमों में भीड़ इक्कट्ठी की जा रही है। 

उन्होंने कहा कि द्रंग के लिए स्वीकृत दमकल विभाग व सब जज कोर्ट कार्यालय मुख्यमंत्री अपने गृह क्षेत्र थुनाग ले गए। मुख्यमंत्री मंडी से हैं और मैंने सबसे पहले उनका स्वागत किया था। मगर आज मंडी जिला के दस में से मात्र दो ही विधानसभा क्षेत्रों का विकास हो रहा है। आठ विधानसभा क्षेत्रों से भेदभाव किया जा रहा है।  मंडी के पूर्व सीएमओं पर 35 करोड़ का घोटाला करने के आरोप लगें हैं। इस मामले पर सरकार क्यों चुप है। बिना टेंडर घटिया क्वालिटी की दवाइयां खरीदी गई है। माननीय हाइकोर्ट ने 21 मई तक जवाब मांगा है।