टिकट आवंटन के मज़ाक का राजनीतिक अर्थ

  • 17 Oct 2017
  • Reporter: विवेक अविनाशी

हिमाचल में चुनावों की घोषणा के बाद देश की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में टिकट आवंटन को ले कर जो धमाल पिछले दो सप्ताह से मचा है, वह रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। सोशल मीडिया ने दोनों पार्टियो के संभावित प्रत्याशियों को ले कर जो क्यास लगाने शुरू किए, उसने हिमाचल के सुलगते हुए माहौल में घी का काम किया।

हिमाचल प्रदेश में नवंबर मास में चुनाव होने हैं और दोनों पार्टियों ने अभी तक प्रत्याशियों की अधिकृत सूची जारी नहीं की है। कांग्रेस पार्टी  का आंतरिक कलह तो समझ में आती थी,और इस कारण प्रत्याशियों की घोषणा में देर हो सकती थी। लेकिन, जिस प्रकार भारतीय जनता पार्टी के हाई कमान ने टिकट आवंटन मज़ाक बना कर हिमाचल की जनता को परोसा है उसका राजनीतिक अर्थ समझना आम वोटर की समझ से परे है।

प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में उम्मीदवारों के चयन को ले कर राज्य स्तरीय मंथन पहली बार बिलासपुर के नयना देवी में हुआ। सज-धज कर हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता नयना देवी पहुंचे और माता श्री नयना देवी के चरणों में शीश नवाने के बाद उम्मीदवारों पर मंथन शुरू हुआ। अपने मंथन को और धार देने के लिए एक बार फिर चंडीगढ़ में विचार-विमर्श के लिए बैठक  की नौटंकी की गई। अपनी राय को हाई कमान तक पहुंचाने के लिए सभी नेता दिल्ली पहुंचे।

मामला सब कुछ सामान्य चल रहा था। तय था अगले दिन  प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जाएगी कि अचानक हाई कमान का  राजनीति में नारी-सशक्तिकरण संकल्प उजागर हुआ और धड़ाधड़ तयशुदा नामों पर हाइकमान की गाज गिरने लगी । इस दौरान कांग्रेस पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में आने वालों का मामला भी हाई कमान के विचारार्थ रखा गया। इस प्रकरण में चौपाल और मंडी से पार्टी को थोड़ी बहुत सफलता मिली। इस चक्कर में चौपाल और मंडी के भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार  तय हो गए। यानी दो सीटों का पचड़ा समाप्त हुआ।

 नारी-सशक्तिकरण की पहली गाज़ गिरी पालमपुर और भोरंज पर। भोरंज में तो 6 महीने पहले चुनाव जीतने वाले डॉ. अनिल धीमान  की राह में नारी-सशक्तिकरण आ बैठा और दूसरी ओर पालमपुर  की सीट को निशाना बनाया गया।  शांता  कुमार के लिए पालमपुर की सीट  सदैव प्रतिष्ठा से जुड़ी रही है । उन्हें इस बात का मलाल नहीं था कि  पालमपुर के लिए किसी नए उम्मीदवार की घोषणा की जा रही है बल्कि अचंभा इस बात का था कि अंतिम समय में जब सब कुछ तय हो गया पालमपुर की सीट को विवाद के लिये चुना गया । अपने स्वभाव के मुताबिक शान्ता कुमार एक बार कठोर शब्दों में अपने चहेते उम्मीदवार की पैरवी कर बैठक से चले आये।

इस अवधि में जंगल की आग की तरह पालमपुर, धर्मशाला, ज्वालामुखी में चर्चित उम्मीदवारों के नाम कटने की चर्चाएं गर्म रहीं । आनन-फानन में धर्मशाला के चर्चित बी जे पी उम्मीदवार किशन कपूर  के समर्थकों ने रोष-रैली आयोजित  कर किशन कपूर की होंसला अफजाही की । रोष सारे हिमाचल में फैलता गया, खिमी राम, आर.आर कौंडल और प्रवीण शर्मा के समर्थक सड़कों पर उतर आए । मजबूरन आज की अफवाह के मुताबिक पार्टी हाई कमान 25 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों पर कल दुबारा चर्चा के मूड में है । इसलिए  कल भी बीजेपी उम्मीदवारों की सूची जारी होना असम्भव लग रहा है ।

बीजेपी  हाई कमान ने जिन नामों को क्लियर कर दिया है वे उम्मीदवार अपने प्रचार में जुट गए है। मिसाल के तौर पर कुल्लू से महेश्वर सिंह और सुलाह से विपिन परमार, नूरपुर से राकेश पठानिया और ज्वाली से अर्जुनसिंह। वहीं, कांग्रेस के उम्मीदवार अभी सूची की इंतज़ार में हैं ।

भारतीय जनता पार्टी हाई कमान ने इस बार हिमाचल के कद्दावर नेताओं धूमल-शान्ता को झटका को दिया है मगर प्यार से। हाई कमान सूची प्रकरण हिमाचल संगठन के लिए बिल्कुल नया अनुभव है ।  इस का सीधा सा राजनैतिक अर्थ यही है जिस तरह से यूपी  विधानसभा चुनाव जीता है उसी तरह हिमाचल भी जीतेंगे। यूपी का प्रयोग हिमाचल में सफल हो पायेगा या नहीं यह तो चुनावों के बाद ही पता लगेगा लेकिन यह  तय है अगर यह प्रयोग सफल नही हुआ तो बीजेपी के खाते में यह असफ़लता एक ऐतिहासिक  राजनैतिक भूल की तरह दर्ज होगी और निस्संदेह पार्टी तश्तरी में परोस कर सत्ता फिर एक बार कांग्रेस को सौंप देगी।

(ऊपरोक्त विचार वरिष्ठ स्तंभकार विवेक अविनाशी के हैं। विवेक अविनाशी काफी लंबे अर्से से हिमाचल की राजनीति पर टिप्पणी लिखते रहे हैं और देश के नामचीन पत्र-पत्रिकाओं में इनके विचार पब्लिश होते रहे हैं।)