बाप-बेटे ने पुराने स्कूटर के इंजन से बनाया ट्रेक्टर, 1 लीटर पेट्रोल से करता है 2 बीघा जमीन की जुताई

  • 09 Oct 2019
  • Reporter: सचिन शर्मा

आज हम आप को एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने बिना पढ़े लिखे अपने बेटे के साथ मिलकर पुराने स्कूटर और बाइक के इंजन से किसानों के लिए खेतों को जोतने वाला ट्रैक्टर तैयार कर दिया है। मामला मंडी के उपमंडल सुंदरनगर की ग्राम पंचायत पलौहटा का है। जहां नेरी गांव निवासी रमेश कुमार और उनके बेटे जितेंद्र वर्मा ने मिलकर कबाड़ से कृषि योग्य ट्रैक्टर बनाकर कारनामा कर दिखाया है। उन्होंने बेकार हो चुके स्कूटर और बाइक के चालू हालत के इंजन खरीद कर खेतों में हल जोतने वाले ट्रैक्टर का निर्माण किया है। रमेश कुमार ने कहा कि उनका 4 सदस्यों का आईआरडीपी परिवार है और उनकी बहू पिछले 4 सालों से किडनी के रोग से जूझ रही है। और परिवार की स्थिति ठीक न होने पर भी उन्हें अपनी बहू का हफ्ते में दो बार डाइलिसिस करवाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

रमेश कुमार ने बताया कि अपनी लग्न व कुछ कर दिखाने की चाह ने पिछले एक वर्ष में यह कारनामा कर दिखाया है। अपने कार्य के शुरूआती दौर में यूट्यूब और अपने मकेनिकल कार्य के ज्ञान से उन्होंने स्कूटर का इंजन कबाड़ से खरीदकर हल जोतने वाले ट्रेक्टर में तबदील करने में सफलता पाई है। उन्होंने बताया कि इस खेती योग्य ट्रैक्टर में किसान एक लीटर पेट्रोल से 2 बीघा भूमि की जुताई कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस ट्रैक्टर का वजन लगभग 55 किलोग्राम के करीब है। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर में 5 हल लगे हुए हैं और इसका मूल्य अधिकतम 20 हजार रुपए है। उन्होंने कहा कि इसका डिजाइन बिल्कुल साधारण है और साधारण रिंग व डबल रिंग तीन प्रकार के टायर वर्जन में बनाया गया है।

रमेश कुमार ने कहा कि उनके द्वारा बनाया गया ट्रैक्टर हिमाचल प्रदेश और अन्य पहाड़ी राज्यों के किसानों के लिए वरदान साबित होगा। उन्होंने कहा कि इस ट्रैक्टर को छोटी से छोटी जगह ले जाया सकता है। उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार का वाइब्रेशन नहीं होने के कारण किसान के स्वास्थ्य पर नेगेटिव प्रभाव नहीं डालता है। उन्होंने कहा कि इस ट्रैक्टर के उपयोग से कम खर्च में अधिक खेती की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस ट्रैक्टर का मूल्य कम होने के कारण इसका उपयोग कर गरीब किसान अच्छा लाभ कमा सकता है। जानकारी देते हुए रमेश कुमार ने कहा कि अपने कार्य के शुरुआती दौर में यूट्यूब व अपने मैकेनिकल कार्य के ज्ञान का उपयोग कर डिस्पोजल स्कूटर के इंजन कबाड़ से खरीद कर उसे हल जोतने वाले ट्रैक्टर में तबदील करने में सफलता प्राप्त की।

रमेश कुमार और उनके पुत्र जितेंद्र वर्मा ने कहा कि किसानों को इस ट्रैक्टर की उपयोगिता को लेकर प्रदेश सरकार को प्रोत्साहन देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सस्ते और अधिक मुनाफे वाले ट्रैक्टरों के निर्माण से किसानों को अधिक से अधिक फायदा पहुंचाया जा सकता है। रमेश कुमार ने कहा कि अब इस ट्रैक्टर के सफल होने के बाद भविष्य में बदलाव लाएंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस ट्रैक्टर में बदलाव कर खेत से कचरा,घास व अन्य खरपतवार की सफाई करने के लिए उपकरण लगाएं जाएंगे।